बिहार कुछ सुधरा, पर क्या-क्या बिगड़ा

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बिहार में विधानसभा चुनाव जल्द ही होने वाले हैं. चुनाव से पहले विकास के दावे और राज्य में पिछड़ेपन की सच्चाई पर आरोपों का दौर चल रहा है.

आंकड़ों की नज़र से देखें तो मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के कार्यकाल में बिहार में विकास दर कुछ सुधरी है.

लेकिन सच्चाई सिर्फ़ इतनी ही नहीं है. विकास दर में सुधार के बावजूद बिहार कई मामलों में अब भी सबसे निचले पायदान पर है.

पहली कड़ीः आंकड़ों में देखिए बिहार का पिछड़ापन

वर्ष 2011 की जनगणना के मुताबिक़ भारत में सबसे कम साक्षरता दर बिहार की है. जनगणना के मुताबिक़ बिहार के 64 फ़ीसदी लोग यानी 10 करोड़ 40 लाख लोग निरक्षर हैं. ये आँकड़ा कई अफ़्रीकी देशों जैसे मलावी, कांगो और सूडान से भी बुरा है.

ग़रीब राज्यों में बिहार में शिक्षा की स्थिति चिंताजनक है. अपराध के आँकड़ों में भी राज्य का हाल बुरा है. लेकिन शिशु मृत्यु दर में कमी आई है.

मध्यप्रदेश, ओडिशा, झारखंड, छत्तीसगढ़, उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश के मुक़ाबले बिहार की क्या स्थिति है, आइए देखते हैं आंकड़ों की नज़र में.

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( इंडियास्पेंड की रिसर्च पर आधारित)

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