जहां भारतीय मर्दों की है 'नो एंट्री'

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हिमाचल प्रदेश का कसोल क़स्बा इसराइली पर्यटकों में इतना लोकप्रिय है कि उसे 'मिनी इसराइल' कहा जाता है, लेकिन वहां भारतीय पुरुषों के आने पर कई लोगों को सख़्त आपत्ति है.

इसराइली पर्यटकों से अपनी रोज़ी रोटी कमाने वाले स्थानीय कारोबारी कहते हैं कि सभी भारतीय पुरुष पर्यटक बुरे नहीं होते, लेकिन ज़्यादातर के साथ उनका अनुभव ज़्यादा अच्छा नहीं रहा है.

हालत ये है कि कई गेस्ट हाउस तो भारतीयों को ठहराने से भी मना कर देते हैं.

पढ़िए पूरी रिपोर्ट

पिछले रविवार को दिल्ली से मनाली गई एक भारतीय महिला को कैफ़े 'फ़्री कसोल' में प्रवेश करने से मना कर दिया गया.

रितिका सिंह अपने दोस्त ब्रितानी म्यूजीशियन स्टीफ़न केये के साथ वहां गई थीं.

उन्होंने जब कैफ़े के मैनेजर शंकर से मेन्यू मांगा तो बताया जाता है कि उन्होंने कहा कि यह केवल सदस्यों के लिए है.

ये है हिमाचल में बसा मिनी इसराइल

इसके कुछ मिनट बाद ही जब स्टीफ़न ने मेन्यू मांगा तो मैनेजर ने उनका स्वागत किया.

स्टीफ़न को यह अजीब लगा और उन्होंने अपनी दोस्त को प्रवेश से मना किए जाने का विरोध किया.

उन्होंने मुझे वो घटना मुझे बताई और मैंने इसे सोशल मीडिया पर पोस्ट कर दिया.

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बाद में मैंने एक इसराइली टेलीविज़िन चैनल ‘चैनल 10 न्यूज़’ पर इसके बारे में सुना और रिपोर्टर शेविट ग्रीनबर्ग ने मुझे लिखा कि अगर यह घटना सही है तो वो शर्मिंदा हैं और घटना के बारे में सच्चाई जानना चाहते हैं.

माफ़ी

मैंने कहा कि मैं कसोल जाउंगी और देखूंगी कि कैफ़े में जाने दिया जाता है या नहीं. हालांकि इस बीच बहुत सारे लोगों ने यहां होने वाले भेदभाव के बारे में लिखा.

कसोल एक इसराइली कालोनी की तरह दिखता है, जहां सब कुछ यही समुदाय नियंत्रित करता है.

स्थानीय लोग उनका स्वागत करते हैं क्योंकि उनका व्यवसाय इन्हीं लोगों से जुड़ा हुआ है.

जब हम कैफ़े 'फ़्री कसोल' पहुंचे तो हमें अंदर आने दिया गया और मैनेजर ने पिछली घटना को एक ग़लतफ़हमी बताते हुए माफी मांगी.

शंकर ने बताया कि यह कैफ़े हिमाचल की एक महिला सासी देवी का है और वो पिछले 13 सालों से उनके साथ पार्टनरशिप में इसे चला रहे हैं.

यहां सब कुछ हिब्रू में लिखा है.

दखल पसंद नहीं

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इसके बाद शंकर ने कसोल क़स्बे के बारे में बताना शुरू कर दिया.

सालों से इसराइली इस इलाक़े को घूमने, हिप्पी की तरह जीने और गांजा पीने आते हैं, क्योंकि यहां पैदा होने वाला गांजा दुनिया में सबसे बढ़िया माना जाता है.

वो कहते हैं, “सालों से मेरा इन इसराइलियों से संपर्क रहा है और मैं जानता हूं कि वो बहुत सख़्त मिजाज के होते हैं. मैंने इनमें से कइयों को निकाला भी है. भारत के लोगों के लिए यह एक अलग ही कहानी है.”

मैंने पूछा, “लेकिन आपने हमें आने दिया.”

उन्होंने कहा, “हम भेदभाव नहीं करते. लेकिन इस इलाक़े में आने वाले अधिकांश भारतीय टूरिस्ट आदमी होते हैं, जिन्होंने धूम्रपान करतीं और अलग तरह से कपड़े पहने लड़कियों को देखा नहीं है. वो घूरते हैं, छेड़खानी करते हैं और हंगामा खड़ा करते हैं.”

शंकर कहते हैं, “मैं ये नहीं कह रहा कि सभी भारतीय टूरिस्ट बुरे हैं लेकिन वो सोचते हैं कि इसराइलियों से मिलने का उन्हें अधिकार है. इसराइली इसे पसंद नहीं करते और क्योंकि वो यहां बहुत बड़ी संख्या में आते हैं तो अपनी अलग जगह बनाने की कोशिश करते हैं और हम उनकी समस्या को समझते हैं.”

सुरक्षा की चिंता

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शंकर के मुताबिक़, “यहां बहुत कुछ उस बिजनेस पर टिका हुआ है, जो इसराइलियों की वजह से आता है. वो यहां महीनों रुकते हैं. यहां और भी विदेशी पर्यटक हैं लेकिन उनकी संख्या बहुत कम है.”

हम कैफ़े से उस ओर निकलते हैं जहां खबद हाउस है. वहां हमने देखा कि मोटरसाइकिल सवार भारतीय पुरुषों का एक समूह, कार में बैठीं विदेशी महिलाओं को घूर रहा है.

यहां एक इसराइली ने कहा, “इस तरह की घटनाएं यहां होती रहती हैं. यह एक धार्मिक स्थान है. यहां हम दूसरों को अंदर नहीं आने देते. जब भी वो हमारे साथ आते हैं तो हम पहले अपनी सुरक्षा के बारे में सुनिश्चित कर लेते हैं.”

जब मैंने उससे कहा कि मैं पत्रकार हूँ तो उसने अंदर आने दिया.

भारतीय टूरिस्टों से परहेज

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इन इलाक़ों में रहने वाली कुछ महिलाएं ने बताया कि भारतीय पुरुष सैलानी उनसे भी छेड़खानी करते हैं जिससे उन्हें भी डर और खीझ होती है.

जब हम अपने गेस्ट हाउस लौटे तो इसके मालिक गोविंद ने बताया कि वो भी अपने यहां बहुत सारे भारतीय लोगों को नहीं ठहराते और उन्हें मना कर देते हैं.

उन्होंने कहा कि यहां बहुत सारी जगहें हैं जहां भारतीयों को आने से मना करते हैं क्योंकि वो नहीं चाहते कि उनके यहां आए इसराइली टूरिस्ट चले जाएं.

वो कहते हैं, “वो शराब पीते हैं और बुरा बर्ताव करते हैं, इसलिए हम उन्हें अपने यहां नहीं आने देते. भारतीय टूरिस्टों के ख़िलाफ़ हमारे मन में कोई दुर्भावना नहीं है, लेकिन हमारा अनुभव कुछ अच्छा नहीं रहा है.”

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