'लंदन में वायु प्रदूषण से 9,500 मौतें'

प्लेबैक आपके उपकरण पर नहीं हो पा रहा

भारत के पर्यावरण और वन मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने बीबीसी हिंदी से हुई बातचीत में माना है कि भारत और ख़ास तौर से दिल्ली में वायु प्रदूषण गंभीर रूप ले चुका है.

साथ ही उन्होंने विश्व के दूसरे बड़े शहरों में बढ़ते प्रदूषण को भी ख़तरनाक बताते हुए कहा कि भारत सरकार 'जल्द ही समस्या का समाधान ढूंढ निकालेगी'.

जावड़ेकर ने दावा किया, "अभी एक रिपोर्ट में पता चला है कि पिछले वर्ष लंदन में 9,500 मौतें वायु प्रदूषण के अलग-अलग कारणों से हुईं. यूरोप में ओज़ोन का प्रदूषण, नेवाडा में धूल प्रदूषण और कैलिफोर्निया समेत अमरीकी शहरों में भी प्रदूषण बढ़ रहा है."

उन्होंने कहा है कि अभी तक सरकार पर्यावरण संबंधी मानकों को लेकर नरम थी और अब ज़्यादा कड़े नियमों को लेकर अनुशासन बढ़ाया जा रहा है.

मौतों पर सफ़ाई

हालाँकि प्रकाश जावड़ेकर ने संसद में दिए अपने उस बयान पर सफ़ाई भी दी है जिसमे उन्होंने कहा था कि अकेले दिल्ली में प्रतिदिन वायु प्रदूषण से क़रीब 80 लोगों की मौत हो रही है.

उन्होंने बताया, "ये बयान एक सवाल के जवाब में दिया गया था जो भाजपा के ही सांसद विजय गोयल ने पूछा था. दरअसल उन्होंने भी किसी अख़बार के आंकड़े बताए थे लेकिन इन रिपोर्ट में 80 मौतों का सीधा ज़िक्र नहीं था".

जावड़ेकर के मुताबिक़ उन्होंने अपने मंत्रालय द्वारा संसद में जवाब देने की प्रणाली का तरीका अब बेहतर किया है और अपने उस बयान पर संसद में ही स्पष्टीकरण भी दे दिया था.

वायु प्रदूषण से निपटना

वर्ल्ड इकोनॉमिक फ़ोरम की एक रिपोर्ट के अनुसार दुनिया के 20 सबसे ज़्यादा प्रदूषित शहरों में से 18 एशिया में हैं. इनमें से 13 सिर्फ भारत में ही हैं.

प्रदूषण और ख़ासतौर से वायु प्रदूषण से निपटने के लिए सरकार की तरफ से कोई बड़ी योजना सामने क्यों नहीं आ रहीं है, इस पर प्रकाश जावड़ेकर ने कहा कि ये धारणा गलत है.

उन्होंने कहा, "अब हमने दिल्ली में 19 स्थानों की मॉनीटरिंग करनी शुरू कर दी है. आठ मानकों पर अलग-अलग रंगों में हवा में मौजूद प्रदूषण दिखाई पड़ सकता है जिससे उचित कदम उठाए जा सके."

जावडेकर के अनुसार भारत के बड़े शहरों में अब 24 घंटे पर्यावरण में मौजूद प्रदूषण का आकलन हो सकता है और इसी के आधार पर उचित कार्रवाई की जाएगी.

(इंटरव्यू की अगली कड़ी में पढ़िएगा सरकार पर्यावरण क़ानून पर क्या सोचती है ?)

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

संबंधित समाचार