मोदी को चुनौती देता वो 22 साल का छोरा

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केवल 22 साल की उम्र में गुजरात सरकार की नींद उड़ा देने वाले हार्दिक पटेल को दो महीने पहले तक बहुत कम लोग जानते थे.

लेकिन गुजरात ही नहीं, उत्तर भारत के अनेक नगरों में और सोशल मीडिया पर उनकी ख़ासी चर्चा है.

तो कौन हैं हार्दिक पटेल और जिन्होंने गुजरात सरकार को मुश्किल में डाल दिया है.

हार्दिक पटेल गुजरात के कड़ी तालुका के भाजपा कार्यकर्ता भरतभाई पटेल के बेटे हैं.

उन्होंने तीन साल पहले अहमदाबाद के सहजानंद कॉलेज से स्नातक किया है.

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गुजरात में आबादी का पांचवां हिस्सा पटेल समुदाय का है.

पटेल समुदाय आरक्षण और ओबीसी दर्जा दिए जाने की मांग को लेकर पिछले कई सालों से आंदोलन करता रहा है.

कमान नई पीढ़ी के हाथ में

इस आंदोलन की कमान अब नई पीढ़ी के हार्दिक पटेल की हाथों में है.

कॉमर्स छात्र हार्दिक पटेल ठान चुके हैं कि वे गुजरात में पटेल समुदाय को ओबीसी का दर्जा दिए जाने के मुद्दे पर चुप नहीं बैठेंगे.

उनकी अगुआई में पिछले 40 दिनों से गुजरात में आंदोलन और विरोध प्रदर्शन चल रहा है.

हार्दिक पटेल के कंधे से कंधा मिलाते हुए इस संघर्ष में हज़ारों लोग सड़कों पर उतर चुके हैं.

उनके तेवर और मक़सद के आगे मोदी सरकार भी दबाव में दिखाई दे रही है. इस आंदोलन के कारण प्रधानमंत्री मोदी के गुजरात विकास मॉडल के दावों पर भी सवाल उठ रहे हैं.

जो आंदोलन अब हार्दिक पटेल की अगुआई में चल रहा है, पटेल समुदाय को ओबीसी का दर्जा दिए जाने के लिए इस आंदोलन के आगे 30 साल पहले गुजरात की तत्कालीन सरकार को घुटने टेकने पड़े थे.

फरवरी 1985 के विधानसभा चुनाव में 148 सीटों के बहुमत के बावजूद पटेल समुदाय के सड़क पर उतरने के बाद मुख्यमंत्री माधव सिंह सोलंकी को इस्तीफ़ा देना पड़ा था.

(इस लेख में प्रस्तुत सारे आंकड़े बीबीसी संवाददाता अंकुर जैन की रिपोर्ट पर आधारित हैं.)

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