किसानों को भी रुला रहा है प्याज़

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Image caption लासलगांव की ये मंडी ट्रकों से भरी रहती थी

भारत की सबसे बड़ी प्याज़मंडी लासलगांव में कभी सैकड़ों ट्रक खड़े होते थे. अब वहां गिने चुने ट्रैक्टर और टैम्पो खड़े हैं.

प्याज़ के खुदरा दाम भले ही 70-80 रुपए किलो हों लेकिन यहां किसानों के पास बेचने के लिए प्याज़ ही नहीं है.

"हमारा भी जी करता है कि सेब खाएं. लेकिन 200 रुपए किलो वाला सेब ख़रीदकर खाने की ताक़त हम में नहीं है. अब लोगों को प्याज़ के लिए भी यह आदत डालनी चाहिए. अगर आप प्याज़ ख़रीद सकें तभी उसे खाएं, वरना नहीं खाएं,”

यह कहते हुए नासिक जिले के पाटोदा गांव के दत्तात्रय कुंभारकर के चेहरे पर तनाव साफ़ झलकता है.

लासलगांव मंडी में इकट्ठा सैकड़ों किसानों में से एक दत्तात्रय भी हैं.

दत्तात्रय बताते हैं, “हमारे यहां केवल दो प्रतिशत किसानों के पास प्याज़ है. वह भी आने वाले एक हफ़्ते में खत्म हो जाएगा.’’

मंहगा सौदा

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Image caption प्याज़ की खेती किसानों के लिए मंहगी साबित हुई

इन किसानों के लिए प्याज़ उगाना अक्सर महंगा सौदा साबित होता है.

फरवरी और मार्च में ओले गिरने और बेमौसम बारिश ने किसानों की रीढ़ तोड़ दी है.

कुंभारकर कहते हैं, "प्याज़ की फसल के लिए प्रति एकड़ डेढ़ लाख रुपए ख़र्च होते हैं. लेकिन हमारा हाल यह है कि तीन एकड़ में केवल 50 क्विंटल प्याज़ खड़ा है. 5000 रुपयों का रेट मिले, तो भी हमें ढाई लाख रुपए का नुकसान होगा.”

मंगलवार को प्याज़ की दरें धड़ाम से नीचे आ गईं.

बिचौलियों ने सोमवार को बाजार पूरी तरह बंद रखा था. यही वजह है कि कई किसान अपना रहा-सहा माल बाज़ार में ले आए.

बिचौलियों को मुनाफ़ा

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Image caption ख़राब मौसम और बिचौलियों के मारे हैं प्याज़ के किसान

नतीजा यह हुआ कि पिछले हफ़्ते साढ़े पांच हजार रुपए क्विंटल को छूने वाला बढ़िया वाला प्याज़ आज 4900 रुपयों तक फिसल गया.

दूसरे दर्जे का प्याज़ तो बमुश्किल 3000 रुपए प्रति क्विंटल पर ही बिका.

किसान अपना प्याज़ बेचने को मजबूर हैं क्योंकि वो उसका भंडारण नहीं कर सकते.

वहीं बिचौलिए सबसे ज्यादा मुनाफा कमाते हैं.

जब लासलगांव मंडी में प्याज़ 5000 रुपए प्रति क्विंटल मिल रहा था तब बाहर प्याज़ के दाम 60-70 रुपए किलो थे.

हालांकि, इन किसानों को मंगलवार की नीलामी में अच्छी दरें नहीं मिली, लेकिन प्याज़ की दरें बढ़ने को लेकर वे उत्साहित हैं.

हालांकि उनमें ग़ुस्सा भी दिखता है.

धारणगांव के किसान रावसाहब रोकडे कहते हैं, "प्याज़ की कीमतें बढ़ते ही शहरी लोग चिल्लाने लगते है.

हमारी मुसीबत कोई नहीं समझता. कई लोगों की फसलें तो खेत से काटकर घर में रखते रखते ओलों के कारण बर्बाद हुई है."

किसान भी डरते हैं बिचौलियों से

असल में प्याज़ का कारोबार बिचौलियों के हाथों में हैं, वो ही प्याज़ की कीमत तय करते हैं. शायद यही वजह है कि किसान भी उनसे डरते हैं.

हालांकि नासिक ज़िला प्रशासन का कहना है कि वो बिचौलियों पर कार्रवाई कर रहा है.

प्रभारी जिला आपूर्ति अधिकारी गोरक्षनाथ गाडीलकर बताते हैं, "357 व्यापारियों पर छापे डाले गए. इनसे पता चला कि 15,000 मैट्रिक टन प्याज़ की जमाखोरी की गई है.’’

इन आंकड़ों के मद्देनजर कई लोग यह भी मानते हैं कि प्याज़ की किल्लत प्राकृतिक नहीं बल्कि बनावटी है.

मुद्दा चाहे जो हो, लासलगांव की मंडी अब सूनी-सूनी है. प्याज़ किसान और ग्राहक दोनों को रुला रहा है.

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