'पर्यावरण क़ानून तोड़ने पर चलेगा कार्रवाई का डंडा'

प्रकाश जावड़ेकर

बीबीसी हिंदी से बातचीत में भारत के पर्यावरण एवं वन मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कहा कि इस वर्ष सरकार क़ानूनों को मनवाने के लिए कड़े कदम उठाएगी.

पिछले एक वर्ष में मोदी सरकार के पर्यावरण मंत्रालय को जितनी शाबाशियां मिलीं हैं, उतनी ही उनकी आलोचना भी हुई है.

इस मंत्रालय पर सैकड़ों प्रोजेक्ट्स को आनन-फ़ानन में हरी झंडी दिखाने का आरोप लगा है जिसे प्रकाश जावड़ेकर ने बेबुनियाद बताया है.

उनके मुताबिक़ सरकार ने 'पहले वर्ष के कार्यकाल में बिज़नेस को आसान बनाने की कोशिश की और अब दूसरे वर्ष में क़ानून का उल्लंघन करने वालों पर कार्रवाई का डंडा चलेगा'. नए क़ानून क्यों नहीं?

राजनीतिक फ़ैसला लेना बाक़ी है

इमेज कॉपीरइट moef.nic.in

बीबीसी ने प्रकाश जावड़ेकर से पूछा कि जब वे विपक्ष में थे तब पुराने क़ानूनों की ओर इशारा करते थे, लेकिन जब सरकार में हैं तो क़ानून क्यों नहीं बना रहे हैं.

जावड़ेकर ने तपाक से जवाब दिया, "ऐसा नहीं है, हम नए क़ानून बना रहे हैं, जो संसद के शीतकालीन सत्र में पास भी होंगे. छह क़ानूनों की समीक्षा सुब्रमण्यम समिति ने की है और सभी बेहतर सुझावों पर अमल किया जाएगा. हमें अब एक राजनीतिक फ़ैसला लेना है बस."

हालांकि प्रकाश जावड़ेकर ने माना कि पर्यावरण और वन मामलों के नियमों का पालन करने में भारत का इतिहास लचर रहा है, जिसे वे सुधारने में लगे हैं .

उन्होंने कहा, "मंत्रालय ने प्रदूषण फैलाने वाले 2000 उद्योगों को नोटिस दिया है कि वे ऐसे यंत्र लगाएं जिससे प्रदूषण स्तर को हर समय नापा जा सके. एक हज़ार उद्योगों ने इसे लगा भी दिया है."

जावड़ेकर के अनुसार उनके ऑफिस में एक मॉनिटर पर इन उद्योगों का प्रदूषण स्तर दिखाई देता रहेगा और अगर पंद्रह मिनट तक प्रदूषण निर्धारित स्तर से ऊपर गया तो तुरंत कार्रवाई होगी'.

'मंत्रालय डेड नहीं, रुका हुआ था'

इमेज कॉपीरइट Greenpeace

प्रकाश जावड़ेकर ने इस बात पर भी खुलकर बात की कि पिछली सरकार में पर्यावरण मंत्रालय के बारे में उनकी राय बदलती नहीं रही है.

पूछे जाने पर कि यूपीए सरकार के पर्यावरण मंत्रालय को उन्होंने 'डेड मंत्रालय' कहा था, वे बोले कि ऐसा नहीं है और 'दरअसल ये एक रुका हुआ स्पीड-ब्रेकर वाला मंत्रालय था'.

उन्होंने कहा, "मानसिकता थी कि हर काम को अटका दो. मिसाल के तौर पर हमने अभी-अभी ओखला पक्षी विहार और नोएडा में हज़ारों फ़्लैट खरीदने वालों के अधर में लटके भविष्य को सुधार दिया".

हालाँकि ये भी सच है कि तमाम पर्यावरण कार्यकर्ताओं ने सरकार के इस फ़ैसले का ये कहकर विरोध किया है कि, 'इससे पक्षी विहार और पर्यावरण को ज़बरदस्त नुकसान होने वाला है.'

लेकिन जावड़ेकर के अनुसार सरकार पर्यावरण के साथ-साथ सतत विकास को लेकर प्रतिबद्ध है.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

संबंधित समाचार