देश विभाजन की यादों का म्यूज़ियम

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देश विभाजन की अच्छी-बुरी यादों को तस्वीरों, किस्से और कहानियों के रूप में सहेजने का प्रयास किया जा रहा है.

इस मुहिम से जुड़ीं लेखिका किश्वर देसाई के मुताबिक़ एक ऐसा म्यूज़ियम बनाने की कोशिश की जा रही है, जहाँ विभाजन से जुड़ी चीज़ों को रखा जा सके.

इस काम में उनका साथ दे रहे हैं उनके पति लॉर्ड मेघनाद देसाई और पाकिस्तान की सलीमा हाशमी, जो प्रख्यात शायर फ़ैज़ अहमद फ़ैज़ की बेटी हैं. इससे पाकिस्तानी कॉलमिस्ट जुगनू मोहसिन भी जुड़ी हुई हैं.

हालांकि यह म्यूज़ियम कहां बनेगा और कबतक बनेगा अभी तक यह तय नहीं है.

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इस मुहिम से जुड़ने के लिए भारत-पाकिस्तान में समान रूप से मशहूर सआदत हसन मंटो के परिवार से भी बातचीत चल रही है.

ज़रुरत

विभाजन के समय क़रीब दो करोड़ लोगों को विस्थापित होना पड़ा था. इस दौरान हज़ारों लोगों की जान गई थी. विभाजन एक बहुत ही भयावह और दर्दनाक घटना थी.

किश्वर कहती हैं, "इस म्यूज़ियम में उन लोगों की आपबीती का दस्तावेज़ीकरण किया जाएगा, जिन्हें बंटवारे की वजह से सबसे ज़्यादा पीड़ा पहुंची. उनके साथ क्या हुआ? किस-किस दिन क्या क्या हुआ था? उस वक़्त के इतिहास को हम इस म्यूज़ियम के ज़रिए ज़िंदा रखना चाहते हैं."

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किश्वर कहती हैं, "इन सब बातों का दस्तावेज़ीकरण किया जाएगा जिससे लोगों को यह पता चल सके कि बंटवारा कितना भयानक होता है. ऐसा दोबारा न हो."

जर्मनी में 'हॉलोकास्ट म्यूज़ियम' और दक्षिण अफ़्रीका में 'अपार्थाइड म्यूज़ियम' है. लेकिन भारत में बंटवारे पर बात करने से लोग घबराते हैं.

इस विषय पर और बातचीत करने के लिए 29 अगस्त को नई दिल्ली में एक बैठक बुलाई गई है. इसमें फ़िल्मकार महेश भट्ट और इस मुहिम से जुड़े अन्य लोग मौजूद रहेंगे.

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