पुरुषों जैसी नहीं है महिलाओं की 'वायग्रा'

इमेज कॉपीरइट Thinkstock

हाल में एक अमरीकी कंपनी ने महिलाओं के लिए एक दवा बनाई है, ऐड्डी, जो 'फीमेल वायग्रा' के नाम से चर्चा में आई.

पर कई डॉक्टरों की राय लेने पर हमने पाया कि महिलाओं में 'सेक्सुअल डिज़ायर' यानि कामेच्छा बढ़ाने वाली ये दवा दरअसल पुरुषों के लिए बनी दवा 'वायग्रा' से बहुत अलग है.

उनके मुताबिक़ 'ऐड्डी' को 'फ़ीमेल वायग्रा' कहना ही ग़लत है. बल्कि पुरुषों के लिए बनी 'वायग्रा' और महिलाओं के लिए बनी 'ऐड्डी' के फ़र्क़ जानने पर पुरुषों और महिलाओं की 'सेक्सुअल डिज़ायर' के बारे में बेहतर समझ बन सकती है.

इमेज कॉपीरइट Getty

मक़सद: 'वायग्रा' का काम पुरुष की कामेच्छा बढ़ाना नहीं है बल्कि उन्हें 'इरेक्शन' पाने में मदद करना है. वहीं 'ऐड्डी' का मक़सद महिलाओं की 'सेक्सुअल डिज़ायर' बढ़ाना है. 'ऐड्डी' महिलाओं के शरीर में 'ऑर्गैज़म' पैदा करने जैसा कोई 'फ़िज़िकल रिऐक्शन' नहीं पैदा करती.

'सेक्सुअल डिज़ायर': पुरुषों में 'वायग्रा' तभी काम करेगी अगर उनमें पहले से कामेच्छा हो और वे उसे बढ़ाने का ख़ुद प्रयास करें. वहीं 'ऐड्डी' उन महिलाओं के लिए है जिनकी 'सेक्सुअल डिज़ायर' ख़त्म या कम हो गई है. ये दवा उसे वापस जगाने में मदद करने का दावा करती है.

खाने का तरीक़ा: 'वायग्रा' या उसके जैसी अन्य दवाओं का इस्तेमाल फ़ौरन नतीजा पाने के लिए किया जाता है. इसीलिए ये दवा यौन संबंध बनाने से पहले खाई जाती है. पर 'ऐड्डी' की टैबलेट रोज़ाना खाने की ज़रूरत होगी क्योंकि महिलाओं की 'सेक्सुआलिटी' ऐसे सीधे-सपाट तरीक़े से नहीं चलती. और एक टैबलेट खाने से फ़ैरन नतीजा नहीं मिलता.

इलाज: मेडिकल साइंस की नज़र से दोनों दवाएं अलग तरीक़े से काम करती हैं. 'वायग्रा' जैसी दवा पुरुषों के शरीर में ख़ून का प्रवाह बढ़ाती हैं और मूलत: 'इरेक्टाइल डिसफ़ंक्शन' की बीमारी का इलाज करती हैं. वहीं 'ऐड्डी' लगभग उसी तरह काम करती है जैसे 'डिप्रेशन' की दवा. यानि वो महिला के मस्तिष्क के केमिकल संतुलन को बदल कर 'सेक्सुअल डिज़ायर' बढ़ाने की कोशिश करती है.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए यहां क्लिक करें. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर भी फ़ॉलो कर सकते हैं.)

संबंधित समाचार