'फांसी केवल आतंकवाद, देशद्रोह के मामलों में हो'

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विधि आयोग ने आतंकवादी गतिविधियों और देश के ख़िलाफ युद्ध छेड़ने के मामलों को छोड़कर बाकी मामलों में फांसी की सज़ा ख़त्म करने की सिफ़ारिश की है.

दिल्ली हाईकोर्ट के पूर्व चीफ जस्टिस ए पी शाह ने 'मौत की सज़ा' पर रिपोर्ट नंबर 262 पेश की जिसमें ये सिफ़ारिश की गई है.

विधि आयोग के तीन सदस्यों- ऊषा महरा और सरकार के दो प्रतिनिधियों ने इसका विरोध किया और फांसी की सज़ा बरकरार रखने का समर्थन किया.

आयोग में चेयरमैन के अलावा तीन पूर्णकालिक सदस्य, दो सरकारी प्रतिनिधि और तीन पार्ट टाइम सदस्य हैं.

रिपोर्ट की मुख्य बातें

आयोग का मानना है कि आतंकवादी गतिविधियों को छोड़ दें, तो मौत की सज़ा जुर्म रोकने में उम्र कैद से ज़्यादा कारगर दंड नहीं है.

ये भी माना गया कि आतंकवादी गतिविधियों को और अपराधों से अलग करके देखने का कोई ख़ास कारण नहीं है लेकिन इस मामले में मौत की सज़ा को हटाने से कई बार राष्ट्रीय सुरक्षा को लेकर चिंता जताई जाती है.

रिपोर्ट के मुताबिक 'रेयरेस्ट ऑफ रेयर' का नियम संवैधानिक रूप से वहनीय नहीं है.

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