'जिनसे खून का रिश्ता, वही कर सकता है अंगदान'

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भारत में अंगदान के लिए क़ानून 1994 में बना था जिसमे कई बार संशोधन भी किए गए हैं.

भारत के क़ानून के हिसाब से मानव अंगों को खरीदना और बेचना, दोनों ही ग़ैर क़ानूनी हैं और इसके लिए सज़ा का प्रावधान किया गया है.

किस राज्य में होता है सबसे ज्यादा अंग दान

जीवित लोग सिर्फ़ अपने खून के रिश्ते वालों को ही अंगदान कर सकते हैं.

अंगदान: ग़रीब दाता अमीर पाता

एक झलक भारत में अंगदान से जुड़े क़ानून की और उसकी तुलना में दूसरे देशों के प्रावधानों से -

भारत

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भारत में अंगदान का क़ानून 1994 में बना जिसके तहत जिनसे खून का रिश्ता हो, सिर्फ़ वही मरीज़ को अंगदान कर सकते हैं.

इनमे ससुराल के लोग शामिल नहीं हैं यानी वो अपने दामाद या बहू को अंग दान नहीं कर सकते.

भारत में अंगों का खरीदना-बेचना दंडनीय अपराध है.

स्पेन

अंगदान के मामले में स्पेन दुनिया का सबसे अग्रणी देश है, जहाँ प्रति लाख लोगों में अंगदान करने वाले लोगों का प्रतिशत 35.3 है.

इस देश में हर किसी को क़ानूनन अंगदान करने वाला मान कर चला जाता है.

ईरान

यह एक मात्र देश है जहाँ मानव अंगों को आधिकारिक तरीके से ख़रीदा जा सकता है.

अगर किसी मरीज़ के रिश्तेदारों में से भी कोई अंगदान करने वाला नहीं है तो फिर वो सरकारी संस्था - डायलिसिस एंड ट्रांसप्लांट पेशेंट्स एसोसिएशन (डाप्टा) के माध्यम से अंग का इंतज़ाम कर सकता है.

ईरान की सरकार अंगदान करने वाले को 1200 अमरीकी डॉलर यानी क़रीब 79000 रुपये के मुआवज़े के साथ साथ स्वस्थ्य बीमा भी प्रदान करती है.

इसराइल

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इसराइल में 'डोंट गिव, डोंट गेट' की नीति है यानि अगर आपने अंगदान करने की घोषणा नहीं की है तो आपको भी अंग नहीं मिल सकता है.

यह व्यवस्था 2008 से शुरू की गई है जिसके लागू होने के बाद से वहाँ अंगदान करने वालों की संख्या में खासी वृद्धि हुई है.

अमरीका

अमरीका में ड्राइविंग लाइसेंस लेते समय ही लोगों को क़ानूनन अंगदान करने की घोषणा करनी पड़ती है.

यही वजह है कि यहाँ अंगदान करने वालों का प्रतिशत प्रति दस लाख 26 है.

सिंगापुर

सिंगापुर ने वर्ष 2009 में अपने अंग प्रत्यारोपण क़ानून में संशोधन किया और यह तय किया कि अगर कोई स्पष्ट और लिखित तौर पर ना दे कि वो अंगदान नहीं करना चाहता, सभी नागरिकों को दानकर्ता ही माना जाएगा.

जैसे ही किसी मरीज़ को 'ब्रेन डेड' घोषित किया जाता है उसके अंगों पर अस्पताल का स्वाभाविक हक़ बन जाता है.

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