जस्टिस काटजू के 10 विवादित बयान

मार्कंडेय काटजू इमेज कॉपीरइट Markandey Katju..Facebook

भारतीय सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज और प्रेस काउंसिल ऑफ़ इंडिया (पीसीआई) के चेयरमैन रहे जस्टिस मार्कंडेय काटजू अपने बयानों के कारण कई बार विवादों में घिर चुके हैं.

चाहे वो सनी लियोनी के पक्ष में बोलने की बात हो, मीडिया और सरकार के बीच चर्चा छेड़ने की बात हो या फिर सलमान रुश्दी पर राय देनी हो, जस्टिस काटजू अपनी बात रखने में नहीं हिचकिचाते.

जस्टिस काटजू के विवादित बोल

इमेज कॉपीरइट Getty

जस्टिस काटजू ने हाल ही में महात्मा गांधी को ब्रिटिश एजेंट और सुभाष चंद्र बोस को जापानी एजेंट बताया था. इस बयान को लेकर संसद में भी हंगामा हुआ था.

इमेज कॉपीरइट PTI
Image caption किरण बेदी, शाज़िया इल्मी के साथ सतीश उपाघ्याय

आम आदमी पार्टी की शाज़िया इल्मी को उन्होंने किरण बेदी से सुंदर बताया था. उन्होंने कहा था, "मेरे जैसा आदमी भी जो आम तौर पर वोट नहीं देता (क्योंकि मैं सभी भारतीय राजनेताओं को लफंगा और धूर्त समझता हूँ), शाजिया को वोट देता!"

इमेज कॉपीरइट AP

उन्होंने सलमान रुश्दी को 'मामूली' और 'औसत दर्जे का लेखक' कहा था. उनका कहना था कि रुश्दी का 'मिडनाइट्स चिल्ड्रेन' मुश्किल से महान साहित्य की श्रेणी में आता है.

जस्टिस काटजू ने एक सेमिनार में कहा था कि ‘90 प्रतिशत भारतीय बेवकूफ’ होते हैं जो धर्म के नाम पर आसानी से बहकावे में आ जाते हैं.

इमेज कॉपीरइट PRESS ASSOCIATION

काटजू ने यह भी कहा था कि क्रिकेटरों और फ़िल्मी सितारों को भारत रत्न देना इस सम्मान का मज़ाक उड़ाना होगा क्योंकि इन लोगों का कोई 'सामाजिक सरोकार' नहीं होता.

इमेज कॉपीरइट SUNNY LEONE

रियलिटी शो 'बिग बॉस' से सनी लियोनी चर्चा में आई थीं. उन्हें लेकर बहुत लोगों ने आपत्ति जताई थी. लेकिन काटजू ने कहा था कि अमरीकी पॉर्न स्टार के अतीत के लिए उनकी निंदा नहीं करनी चाहिए.

उन्होंने एक अंग्रेज़ी अख़बार में लिखते हुए दावा किया था कि तमिलनाडु में ज़िला अदालत के एक जज पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप होने के बावजूद उन्हें मद्रास हाईकोर्ट का एडिशनल जज बनाया गया था.

काटजू का दावा था कि यह मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली केंद्र की यूपीए सरकार के दौरान हुआ था.

इमेज कॉपीरइट PTI

मीडिया की स्वायत्ता को लेकर भी काटजू बीच-बीच में बयान देते आए हैं.

वर्ष 2012 में पटना में उन्होंने कहा था, “मैंने सुना है कि लालू के राज में फ्रीडम ऑफ प्रेस होती थी, लेकिन अब बिहार में फ्रीडम ऑफ प्रेस नहीं है.”

उन्होंने कथित 'देशद्रोह' के मामले में कार्टूनिस्ट असीम त्रिवेदी की गिरफ़्तारी का भी विरोध किया था.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉयड ऐप के लिए यहां क्लिक करें. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

संबंधित समाचार