कौन कौन है हड़ताल में शामिल, क्या हैं मांगे?

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विभिन्न मज़दूर संगठनों की एक दिन की हड़ताल का देश भर के कई हिस्सों में असर देखा गया है.

केरल में सामान्य जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है.

देश में 10 ट्रेड यूनियनों की हड़ताल

वहीँ पश्चिम बंगाल में इसका आंशिक असर देिखा. वहाँ लोकल ट्रेन और सड़क यातायात भी प्रभावित हुआ है. दिल्ली के ऑटो और टैक्सी चालकों की यूनियनों ने भी हड़ताल का समर्थन किया है.

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भारतीय स्टेट बैंक को छोड़कर दूसरे कई बैंकों की यूनियन भी हड़ताल में शामिल हैं.

क्या है मांगें?

संगठनों ने सरकार को 12 मांगों की सूची सौंपी है जिसमें मुख्य रूप से न्यूनतम मज़दूरी को 15 हज़ार रूपए करने की मांग की गई है.

संगठनों की मांग है कि अकुशल मज़दूरों की न्यूनतम मज़दूरी 10,000 रूपए तक तय की जाए जबकि कुशल मज़दूरों की मज़दूरी 20 हज़ार रूपए प्रति माह हो.

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दूसरी मांगों में प्रमुख रूप से महंगाई पर रोक, रेलवे और रक्षा में विदेशी पूंजी निवेश यानी ऍफ़डीआई पर रोक, लोक उपक्रमों के विनिवेश पर रोक, ठेकेदारी प्रथा की समाप्ति, बिना सर्वसम्मति के श्रम क़ानून में बदलाव पर रोक, कामगारों के पेंशन में बढ़ोतरी और भविष्य निधि की सीमा की बढ़ौतरी शामिल हैं.

कौन से संगठन शामिल?

सीटू, इंटक, एटक, हिन्द मज़दूर सभा, एआईयुटीयुसी, टीयुसीसी, सेवा, एलपीऍफ़, एआईसीसीटीयु, युटीयुसी.

कौन से संगठन नहीं?

राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ से जुड़ी भारतीय मज़दूर संघ (बीएमएस) ने हालांकि मांगों का समर्थन किया है लेकिन उसने ख़ुद को हड़ताल से अलग बताया है.

बीएमएस के अनुसार सरकार को मांगों पर कार्रवाई के लिए समय दिया जाना चाहिए.

आल इंडिया तृणमूल कांग्रेस ने भी हड़ताल का विरोध किया है.

सरकार का रुख़

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सरकार ने स्पष्ट किया है कि वो मज़दूर संगठनों से मांगों पर वार्ता जारी रखेगी हालांकि उसने हड़ताल पर न जाने की अपील की थी.

बीच में वित्त मंत्री अरुण जेटली के नेतृत्व में सरकार के कुछ मंत्रियों और यूनियन के नेताओं के बीच वार्ता भी हुई थी जिसमे सरकार ने मांगों पर विचार करने का आश्वासन दिया था.

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