ग्रीनपीस का फंडिंग लाइसेंस रद्द

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पर्यावरण मामलों पर काम करने वाले अंतरराष्ट्रीय संगठन ग्रीनपीस ने आरोप लगाया है कि भारत सरकार उसकी आवाज़ को दबा रही है.

सरकार ने भारत में विदेशों से फंड हासिल करने का ग्रीनपीस का लाइसेंस रद्द कर दिया है.

इस कार्रवाई पर प्रतिक्रिया देते हुए ग्रीनपीस ने कहा है कि भारत सरकार विरोध की आवाज़ों को दबा रही है.

ग्रीनपीस के एक अधिकारी ने सरकार की कार्रवाई को 'बेचैनी में उठाया गया क़दम' बताया और कहा कि लोकतंत्र में विरोध को दबाया नहीं जा सकता.

वहीं भारत सरकार का कहना है कि लाइसेंस इसलिए रद्द किया गया है क्योंकि ग्रीनपीस ने विदेशों से फ़ंड लेने के नियमों का उल्लंघन किया है.

उल्लंघन

सरकार का कहना है कि तीन साल पहले ग्रीनपीस ने नियमों का उल्लंघन करते हुए विदेशों से मिले धन को दूसरे खातों में ट्रांसफ़र किया था.

सरकारी आदेश में नौ उदाहरण दिए गए हैं जब ग्रीनपीस ने विदेशी मुद्रा से संबंधित क़ानून का उल्लंघन किया, इनमें भारत में मुकदमे लड़ने के लिए विदेशी मुद्रा का इस्तेमाल और एक विदेशी कार्यकर्ता को गुपचुप तरीक़े से वेतन दिए जाने के आरोप शामिल हैं.

भारत सरकार पहले भी फ़ोर्ड फ़ाउंडेशन जैसे विदेशी ग़ैर-सरकारी संगठनों (एनजीओ) पर कार्रवाई कर चुकी है.

ग्रीनपीस इंडिया ने ट्वीट किया है, "भारत का गृह मंत्रालय हमारे एफ़सीआरए लाइसेंस का पंजीकरण रद्द कर सकता है लेकिन लड़ते रहने के हमारे दृढ़ संकल्प को नहीं छीन सकता."

इसी मामले पर शुक्रवार को दिल्ली हाई कोर्ट में सुनवाई होनी है.

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