तस्वीरों में: मैसूर दशहरे के लिए आने लगे हाथी

इमेज कॉपीरइट imran qureshi

मैसूर का दशहरा सिर्फ़ भारत ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया में मशहूर हैं. मैसूर में 600 सालों से ज़्यादा पुरानी परंपरा वाला यह पर्व ऐतिहासिक दृष्टि से तो महत्वपूर्ण है ही, साथ ही यह कला, संस्कृति और आनंद का भी अनोखा सामंजस्य है.

इमेज कॉपीरइट imran qureshi

दशहरे पर यहां बड़ा आयोजन होता है और मैसूर के पूर्व राजाओं के महल में होने वाले इस आयोजन में हाथियों का ख़ास महत्व है.

इमेज कॉपीरइट imran qureshi

बड़ी संख्या में हाथी मैसूर पहुंच चुके हैं. हालांकि इस बार सरकार ने इस आयोजन को बहुत भव्य नहीं करने का फ़ैसला किया है क्योंकि राज्य के कई इलाकों में सूखा पड़ा है.

इमेज कॉपीरइट imran qureshi

मैसूर के दशहरे का इतिहास मैसूर नगर के इतिहास से जुड़ा है, जो मध्य काल के दक्षिण भारत के विजयनगर साम्राज्य के समय से शुरू होता है. चौदहवीं शताब्दी में स्थापित इस साम्राज्य में नवरात्रि उत्सव मनाया जाता था.

इमेज कॉपीरइट imran qureshi

लगभग छह शताब्दी पुराने इस पर्व को वाडियार राजवंश के शासक कृष्णराज वाडियार ने दशहरे का नाम दिया. समय के साथ इस उत्सव की लोकप्रियता इतनी बढ़ गई कि साल 2008 में कर्नाटक राज्य की सरकार ने इसे 'राज्योत्सव' (नाद हब्बा) का स्तर दे दिया.

इमेज कॉपीरइट imran qureshi

विजयादशमी के पर्व पर मैसूर का राज दरबार आम लोगों के लिए खोल दिया जाता है. भव्य जुलूस निकाला जाता है. यह दिन मैसूरवासियों के लिए बेहद ख़ास होता है. इस अवसर पर यहाँ दस दिनों तक बेहद धूमधाम से उत्सव मनाए जाते हैं.

इमेज कॉपीरइट imran qureshi

दसवें और आखिरी दिन मनाए जाने वाले उत्सव को जम्बू सवारी के नाम से जाना जाता है. इस दिन सारी निगाहें 'बलराम' नामक हाथी के सुनहरे हौदे पर टिकी होती हैं. इस हाथी के साथ ग्यारह अन्य गजराज भी रहते हैं, जिनकी विशेष साज-सज्जा की जाती है.

इमेज कॉपीरइट imran qureshi

इस मौके पर भव्य जुलूस निकाला जाता है, जिसमें बलराम के सुनहरी हौदे पर सवार हो चामुंडेश्वरी देवी मैसूर नगर भ्रमण के लिए निकलती हैं. वर्ष भर में यह एक ही मौका होता है, जब देवी की प्रतिमा यूँ नगर भ्रमण के लिए निकलती है.

इमेज कॉपीरइट imran qureshi

वाडियार राजाओं के पारंपरिक दशहरा उत्सवों से आज के उत्सवों का चेहरा काफ़ी बदल चुका है. यह अब एक अंतर्राष्ट्रीय उत्सव बन गया है. इस उत्सव में शामिल होने के लिए देश और दुनिया के विभिन्न हिस्सों से मैसूर पहुँचने वाले पर्यटक दशहरा की विविधताओं को देखकर हैरान रह जाते हैं.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

संबंधित समाचार