2006 के मुंबई धमाके: कब क्या हुआ

मुंबई लोकल में धमाके की फाइल फोटो इमेज कॉपीरइट AFP GETTY

नौ साल पहले 11 जुलाई 2006 को मुंबई की लोकल ट्रेन में सिलसिलेवार धमाके हुए थे जिसमें 189 लोगों की मौत हुई थी और 824 घायल हो गए थे.

इस मामले में मकोका की स्पेशल कोर्ट ने 12 लोगों को दोषी करार दिया है.

मुंबई बम धमाके

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वर्ष 2006 में मुंबई में पश्चिम रेलवे की उपनगरीय ट्रेनों में 11 मिनट के अंतराल पर सात धमाके हुए थे.

यह धमाके उपनगरीय ट्रेनों के पहले दर्जे के डिब्बों में रखे गए प्रेशर कुकर बम से कराए गए थे.

पहला धमाका दोपहर 4.35 के आसपास हुआ था. थोड़ी ही देर में माटुंगा, बांद्रा, खार, जोगेश्वरी, बोरीवली तथा भायंदर के पास उपनगरीय ट्रेनों में धमाके हुए.

इन धमाकों में 189 लोगों की मौत हुई थी और 824 घायल हुए थे.

पुलिस की जाँच में क्या पता चला

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पुलिस के मुताबिक मार्च 2006 में लश्कर-ए-तैयबा के आज़म चीमा ने अपने बहावलपुर स्थित घर में सिमी और लश्कर के दो गुटों के मुखियाओं के साथ इन धमाकों की साजिश रची थी.

पुलिस का कहना है कि मई 2006 में बहावलपुर के ट्रेनिंग कैंप में 50 युवकों को भेजा गया. उन्हें बम बनाने और बंदूकें चलाने का प्रशिक्षण दिया गया. साथ ही कड़ी पूछताछ के दौरान अपनाए जाने वाले हथकंडो से निपटने का प्रशिक्षण दिया गया.

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पुलिस ने बताया कि लश्कर-ए-तैयबा ने इन लोगों को अलग-अलग रास्तों से भारत में दाखिल कराया जो मुंबई पहुंचकर चार अलग अलग जगहों पर रहने लगे. इनमें से दो मलाड में, चार बांद्रा, दो बोरीवली और तीन मुम्ब्रा में रहने लगे.

पुलिस के मुताबिक, धमाके के लिए 20 किलोग्राम आरडीएक्स गुजरात में कांडला के रास्ते भारत भेजा गया था और मुंबई से भारी मात्रा में अमोनियम नाइट्रेट खरीदा गया था. आठ प्रेशर कुकर सांता क्रूज़ में दो अलग-अलग दुकानों से ख़रीदे गए थे.

पुलिस का दावा है कि धमाके से एक-दो दिन पहले ही गोवंडी स्थित एक घर में बम बनाए गए थे. हर एक कुकर में दो-ढाई किलो आरडीक्स और साढ़े तीन से चार किलो तक अमोनियम नाइट्रेट भरा गया. इसके बाद यह सारे कुकर बांद्रा ले जाए गए.

पुलिस का ये भी कहना है कि 11 जुलाई 2006 को अभियुक्त सात गुटों में बंटे, हर गुट में दो भारतीय और एक पाकिस्तानी था. हर गुट के पास एक प्रेशर कुकर था जो काली थैली में अख़बार में लपेटकर रखा था.

ऐसे हुई थी तफ्तीश

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इन धमाकों के बाद पुलिस के पास कोई भी सुराग नहीं था.

आतंकवाद निरोधी दस्ते के तत्कालीन प्रमुख केपीएस रघुवंशी ने अधिकारियों की सात टीमें बनाई थी और जांच में रॉ के साथ-साथ आईबी की सहायता भी माँगी थी.

पुलिस ने मुंबई के अलग अलग हिस्सों से करीब 400 लोगों को हिरासत में लिया था.

धमाकों के बाद मलबे से कुकर के हैंडल मिले थे जिसके बाद तफ्तीश ने रफ़्तार पकड़ी और जल्द ही उन दुकानों का पता लगा लिया गया जहाँ से यह कुकर ख़रीदे गए थे.

तफ्तीश में पहली सफलता धमाके के एक हफ्ते बाद तब मिली जब पुलिस ने बिहार के रहने वाले कमाल अहमद अंसारी की अपने बहनोई मुमताज़ चौधरी से टेलीफोन पर हो रही बातचीत सुनी.

इसके बाद एक-एक कर सारी कडियाँ जुड़ती गई.

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