मुंबई में बैन घटा, छत्तीसगढ़ में बैन लगा

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जैन समुदाय के पर्यूषण पर्व के दौरान मांस की बिक्री पर रोक का मुद्दा गरमाता जा रहा है.

छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य में 10 सितंबर से 18 सितंबर तक मांस की बिक्री पर रोक लगा दी है. उधर, राजनीतिक दलों के कड़े विरोध के बाद मुंबई में मांस बिक्री पर पाबंदी को चार दिनों से घटाकर दो दिन तक सीमित कर दिया गया है.

स्थानीय पत्रकार अश्विन अघोर ने बताया कि बृहनमुंबई नगर निगम (बीएमसी) ने इस पाबंदी को केवल 13 और 18 सितंबर तक सीमित रखने का फैसला किया है.

इससे पहले, मुंबई से सटे मीरा भायंदर नगर निगम में पर्यूषण पर्व में आठ दिनों तक मांस बिक्री पर पाबंदी लगाने के फैसले के बाद विवाद खड़ा हो गया था.

सरकार की पाबंदी

मांस की बिक्री पर रोक के विरोध में मुंबई के दादर में शिवसेना और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के कार्यकर्ताओं ने मांस बेचकर विरोध प्रदर्शन भी किया.

शुक्रवार को मुंबई नगर निगम की आम सभा में पार्षदों ने मांस बिक्री पर पाबंदी के खिलाफ़ प्रस्ताव रखा जिसके बाद दो दिन की पाबंदी हटाने पर सहमति बनी.

महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के पार्षद संदीप देशपांडे ने बीबीसी को बताया, "मुंबई शहर में पर्यूषण पर्व में कुल चार दिन तक मांस की बिक्री पर पाबंदी लगी थी. जिसमें राज्य सरकार की दो दिन और मुंबई नगर निगम की दो दिन की पाबंदी शामिल थी. आज हमने इसके विरोध में प्रस्ताव पारित कर दो दिनों की पाबंदी हटा दी है. अब मुंबई में केवल 13 और 18 सितंबर को ही मांस बिक्री पर पाबंदी रहेगी."

मछली पर बैन नहीं

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इस बीच बॉम्बे हाई कोर्ट में मांस बिक्री पर लगी पाबंदी के खिलाफ़ दायर याचिका की सुनवाई के दौरान सरकारी वकील ने काफी हास्यास्पद बयान दिए.

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार की पाबंदी मछलियों की बिक्री पर लागू नहीं है.

जब अदालत ने इसका स्पष्टीकरण मांगा तो महाराष्ट्र के महाधिवक्ता अनिल सिंह ने कहा, "क्योंकि मछलियाँ पानी से बाहर निकलते ही मर जाती हैं, उन्हें चिकन तथा मटन की तरह बेचने से पहले काटा नहीं जाता."

इस याचिका पर अगली सुनवाई 14 सितंबर को होगी.

छत्तीसगढ़ में भी बैन

स्थानीय पत्रकार आलोक पुतुल के अनुसार छत्तीसगढ़ में सरकार ने राज्य भर में 10 सितंबर से 18 सितंबर तक जानवरों के मांस काटने, बेचने और ख़रीदने पर प्रतिबंध लगा दिया है.

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सरकार ने जैन धर्मावलंबियों के पर्यूषण पर्व और हिंदुओं के गणेश चतुर्थी का हवाला देते हुए जानवरों के मांस को प्रतिबंधित किया है.

राज्य सरकार के ताज़ा आदेश के खिलाफ़ भी उच्च न्यायालय में याचिका दायर की गई है, जिस पर शनिवार को सुनवाई होगी.

अखिल भारतीय आदिवासी महासभा के अध्‍यक्ष मनीष कुंजाम ने कहा, "छत्तीसगढ़ के आदिवासियों में मांसाहार की परंपरा है और राज्य सरकार का यह आदेश उनकी सामाजिक और सांस्कृतिक परंपरा के भी खिलाफ है."

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