'सऊदी राजनयिक मामले में भारत के पास कोई चारा नहीं'

पीड़ित महिलाएं इमेज कॉपीरइट Reuters

सऊदी अरब के एक राजनयिक पर नेपाली मूल की महिलाओं के साथ बलात्कार के आरोप लगे हैं. इस मामले में भारत के पास कानूनी कार्रवाई के क्या विकल्प हैं, इस पर बीबीसी संवाददाता विनीत खरे ने बात की वरिष्ठ पत्रकार सिद्धार्थ वरदराजन से.

विनीत खरे-भारत और सऊदी अरब के बीच नज़दीकी सहयोग रहा है, आर्थिक तौर पर भी. तो इस मामले में दोनों देशों के लिए चुनौतियां क्या हैं, ख़ासकर भारत के लिए ?

सिद्धार्थ वरदराजन- भारत के पास ऑप्शन अभी शायद कुछ नहीं है. पुलिस ने अगर चुपचाप मामले को हैंडल किया होता या विदेश मंत्रालय ने हैंडल किया होता और प्रेस को खबर नहीं दी जाती, तो हो सकता है अपने राजनयिक पर कानूनी कार्रवाई करने के लिए सऊदी सरकार राज़ी हो जाती

लेकिन अब बहुत मुश्किल है कि सऊदी अरब ये कुबूल करेगा कि उनके राजनयिक पर भारतीय कानून लागू हो सकता है.

इमेज कॉपीरइट AFP

और अगर सऊदी अरब इजाज़त नहीं देता है तो इंटरनेशनल कानून के तहत भारत सऊदी अरब के राजनयिक पर कोई भी कानूनी कार्रवाई नहीं कर सकता.

और मैं यहां उसी अंतरराष्ट्रीय कानून का ज़िक्र कर रहा हूं जिसका हवाला भारत ने दिया था जब देवयानी खोबरागड़े पर मुकदमा चलाने की कोशिश की गई थी अमेरिका में.

और ये भारत अच्छी तरह समझता है, सऊदी अरब अच्छी तरह समझता है और नेपाल भी इसे समझेगा. अगर मोदी जी सऊदी के शाह को इसके लिए रज़ामंद कर लें कि राजनयिक पर कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए, सिर्फ तभी उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज़ हो सकता है.

वरना सिवाय इसके कि हिंदुस्तान सऊदी राजनयिक को निष्कासित कर दे, इसके अलावा हिंदुस्तान के पास और कोई ऑप्शन, मेरे विचार में, नहीं है.

इमेज कॉपीरइट

विनीत खरे- जिन महिलाओं ने इतने गहरे और संगीन आरोप लगाए हैं, उनके साथ न्याय कैसे होगा?

सिद्धार्थ वरदराजन- जैसे देवयानी खोबरागड़े के केस में वहां पर जो पीड़िता थीं, जो भारतीय मूल की महिला थीं, आखिरकार उनकी नज़रों में उन्हें न्याय नहीं मिला.

उसी तरह इस केस में दोनों नेपाली महिलाओं को ये बात स्वीकार करना ज़रूरी है कि इंटरनेशनल कानून के तहत, सऊदी राजनयिक पर मुकदमा दर्ज़ नहीं हो पाएगा. ये कहना अच्छा नहीं लगता लेकिन ये कड़वा सच है.

सिर्फ एक ही ऑप्शन है कि अगर सऊदी अरब इजाज़त दे तो इन राजनयिक की राजनीतिक इम्युनिटी(प्रतिरक्षा) को दरकिनार कर सऊदी अरब कानूनी कार्रवाई के लिए भारत को सौंप सकता है .

लेकिन वो सऊदी अरब का अपना राजनीतिक फैसला होगा. लेकिन मैं समझता हूं कि सऊदी अरब जैसा मुल्क है या यूं कहे कि कोई भी मुल्क अपने राजनयिक को इस तरह एक्सपोज़ नहीं करना चाहेगा.

क्योंकि अगर मुकदमा चलता है, सज़ा मिलती है तो राजनयिक के साथ साथ कहीं ना कहीं वो देश भी बदनाम होता है. इसलिए मैं समझता हूं कि सऊदी अरब के राजनयिक के खिलाफ़ कार्रवाई नहीं होगी और हिंदुस्तान के पास और कोई चारा नहीं होगा सिवाए इसके कि वो इस राजनयिक को निष्कासित कर दे.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए यहां क्लिक करें. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर भी फ़ॉलो कर सकते हैं.)

संबंधित समाचार