'बाबू लोग पैसा की खातिर दौड़ाय रहे हैं'

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Image caption अब्दुल हमीद की बेटी नाज़बुन्निसा और दामाद शेख अलाउद्दीन

पाकिस्तान के साथ हुए 1965 की लड़ाई में मारे गए अब्दुल हमीद की बेटी नाज़बुन्निसा और दामाद शेख अलाउद्दीन भुखमरी के कगार पर हैं.

शेख अलाउद्दीन डिस्ट्रिक्ट रूरल डेवलपमेंट एजेंसी (जिला ग्राम्‍य विकास अभिकरण) गाजीपुर से लिपिक के पद से फरवरी 2014 में रिटायर हुए थे.

लेकिन उनके अवकाश का नकदीकरण, छठे वेतन आयोग का ऐरिअर और ग्रैच्यूटी का भुगतान आज तक नहीं हुआ है.

नाज़बुन्निसा और उनके पति ने ज़िले के सभी अधिकारियों और प्रदेश शासन को अपनी समस्याएँ बताई हैं लेकिन अभी तक कोई कदम नहीं उठाया गया है.

'घूस मांगते हैं अधिकारी'

नाज़बुन्निसा का आरोप है कि डीआरडीए के कुछ बाबू काम करने के लिए घूस मांगते हैं.

उन्होंने कहा कि इस बारे में उनकी माँ रसूलन बीबी ने भी मुख्यमंत्री को पत्र लिख कर परेशानी से अवगत कराया था लेकिन कुछ नहीं हुआ.

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नाज़बुन्निसा ने बीबीसी को बताया, "शासन से आदेश आ गया है कि इनका भुगतान कर दिया जाए. लेकिन बाबू लोग पैसा की खातिर दौड़ाय रहे हैं."

उन्होंने कहा कि वो अब दौड़-दौड़ कर थक गई हैं और पैसे के लिए परेशान हैं.

'नियम बदलने होंगे'

नाज़बुन्निसा की परेशानी की वजह यह भी है कि उनके चार लड़के हैं जिसमें से सिर्फ़ एक प्राइमरी हेल्थ सेंटर में वार्ड बॉय की नौकरी करता है.

सबसे बड़े लड़के गुड्डू ने बताया कि वो इलाहाबाद यूनिवर्सिटी से स्नातक हैं लेकिन कहीं कोई नौकरी नहीं मिल रही है.

ग़ाज़ीपुर के मुख्य विकास अधिकारी एके पांडे ने कहा, "ये सही है कि शेख अलाउद्दीन को अवकाश का नकदीकरण और ग्रैच्यूटी का भुगतान नहीं हुआ है लेकिन वो इस वजह से कि ग्राम्‍य विकास अभिकरण में इस तरह के भुगतान का कोई प्रावधान नहीं है."

पांडे ने कहा कि इस के लिए नियमों में बदलाव की ज़रुरत है जिसके लिए शासन को खत लिखा जा चुका है.

उन्होंने कहा "जैसे ही हमें कोई आदेश मिलता है हम इनका भुगतान कर देंगे."

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