घर को मिनी रेस्त्रां बनाने का फ़ंडा

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दिल्ली के वसंत कुंज में रहने वाली डॉ विनीता पेशे से डेंटिस्ट हैं. इनके पति भी डेंटल सर्जन हैं.

विनीता समय-समय पर अपने घर को एक रेस्तरां में तब्दील कर देती हैं.

विनीता बताती हैं की शुरू में बहुत हिचकिचाहट होती थी, कैसे आमंत्रण दूँ, कैसा आचरण होगा आदि, लेकिन जब एक दो बार बात की तो पता लगा की मुझे बस खाने पर ध्यान देना है. खाना लज़ीज़ हो तो सब अपने आप हो जाता है.

कई वेबसाइट के ज़रिए लोग इन्हें ढूंढते हैं और इनके घर भोजन करने आ जाते हैं.

घर को बनाएं मिनी रेस्त्रां

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ऐसी ही एक वेबसाइट मील टैंगो डॉट कॉम के सीईओ साकेत बताते हैं कि इस कांसेप्ट के बारे में उन्हें लंदन में पता लगा जिसके बाद उन्होंने इसे भारत में भी शुरू करने का फ़ैसला किया.

उनकी वेबसाइट से लोग अपने पसंद के खाने के अनुसार अपना मेज़बान चुनकर, पैसे चुकाकर उनके घर जाकर खाना खा सकते हैं.

साकेत बताते हैं, “जो लोग ख़ुद को मेज़बान के तौर पर रजिस्टर करते हैं, हम उनका पहले वेरिफ़िकेशन करवाते हैं, ताकि मेज़बान के घर की साफ़ सफ़ाई, खाना बनाने की विधि आदि सही हो.“

कमाई भी

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इस नए कांसेप्ट के ज़रिए गृहणियां भी अपने घर को एक मिनी रेस्त्रां में बदल कर कमाई कर सकती हैं.

जाने माने शेफ़ रणवीर बताते हैं, “आज हम नए लोगों से बात करने में, उन्हें जानने में झिझक महसूस करते हैं, सोशल मील एक ऐसा प्लेटफ़ार्म बन कर उभर सकता है जो इस झिझक को ख़त्म कर सकता है.“

भारत जैसे देश में जहाँ लोग अनजानों से मिलने में और उनसे बातचीत करने में असहज महसूस करते हैं, खाना एक ऐसा ज़रिया ज़रूर बन के उभर सकता है जिससे लोगों के बीच की ये सामजिक, आर्थिक यहाँ तक की धार्मिक दूरियां कम करने में अहम भूमिका निभा सकता है.

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