शीना हत्याकांड: सीबीआई जांच पर 4 सवाल

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Image caption शीना बोरा हत्याकांड की अभियुक्त इंद्राणी मुखर्जी को अदालत ले जाती पुलिस.

बहुचर्चित शीना बोरा हत्याकांड की जांच सीबीआई को सौंपने के महाराष्ट्र सरकार के फ़ैसले से कई सवाल खड़े हुए हैं.

महाराष्ट्र पुलिस के रिटायर्ड आईपीएस अधिकारी वाईपी सिंह के मुताबिकड सरकार के इस फ़ैसले से चार सवाल खड़े होते हैं.

वाईपी सिंह के उठाए चारों सवाल को महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फ़ड़णवीस को ईमेल से भेजे गए. इस पर उनके जनसंपर्क अधिकारी केतन पाठक ने राज्य के गृह विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव केपी बख़्शी से इन सवालों के जवाब मांगने को कहा. लेकिन बख़्शी की तरफ़ से अब तक किसी सवाल का कोई जवाब नहीं मिला है.

1.तबादले की वजह क्या है?

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Image caption राकेश मारिया, पूर्व मुंबई पुलिस कमिश्नर

राकेश मारिया का तबादला आनन-फानन में क्यों किया गया? उनकी जगह अहमद जावेद को लाने से क्या हासिल होगा, जबकि वे तीन महीनों में ही रिटायर हो जाएंगे?

मारिया का तबादला पुलिस महकमें में आईपीएस लॉबी की अंदरूनी राजनीति का नतीजा है. अहमद जावेद महज़ तीन महीनों में कुछ ख़ास काम कर पाएंगे, इसकी संभावना कम है.

यदि मारिया को अपना कार्यकाल पूरा करने दिया जाता तो पद के दूसरे दावेदारों को दिक़्क़त हो सकती थी. यह पद अब डीजी स्तर का हो चुका है. इसलिए हो सकता है मारिया को ही इस पद पर बनाए रखना पड़ता.

तफ़्तीश के दौरान राकेश मारिया मीडिया में काफ़ी छाए हुए थे. यह भी उनके वरिष्ठ अफ़सरों और राजनेताओं को नागवार गुज़रा होगा.

2.वक़्त की बर्बादी नहीं होगी?

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Image caption देवेंद्र फ़डनवीस, मुख्यमंत्री, महाराष्ट्र

जब इस मामले की जाँच क़रीब ख़त्म हो चुकी थी और पुलिस चार्जशीट दाख़िल करने की तैयारी में थी, ऐसे समय में इस मामले को सीबीआई को सौंपा गया. क्या इससे समय की बर्बादी नहीं होगी?

बेशक समय और संसधानों की बर्बादी होगी. जाँच शुरू करने के 90 दिन के भीतर चार्जशीट दायर करना ज़रूरी है. यदि ऐसा नहीं हुआ तो सारे अभियुक्तों को ज़मानत मिल जाएगी. यह एक बहुत बड़ी नाकामी होगी.

3.अफ़सरों को संदेश?

Image caption अहमद जावेद, मुंबई पुलिस प्रमुख

क्या राकेश मारिया को हटाना, मामले को क़मजोर करने की कोशिश है? क्या यह दूसरे अफ़सरों के लिए संदेश है?

मरिया का तबादला प्रशासन के दबाव में लिया गया राजनीतिक फ़ैसला था. मारिया को जिस तरीक़े से पद से हटाया गया, वह पुलिस विभाग में कई अफ़सरों को पसंद नहीं आया. मारिया के हटाए जाने से इस मामले की तफ़्तीश कर रही टीम का मनोबल निश्चित रूप से गिरा है.

4.पुलिस की कार्यक्षमता पर सवाल?

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Image caption इंद्राणी मुखर्जी

जिस समय पुलिस जांच में अच्छा काम कर रही थी, मामला सीबीआई को सौंप दिया गया. क्या यह उसकी कार्यक्षमता पर सवालिया निशान नहीं है?

अपमानजनक तरीक़े से किए गए तबादले के बाद मारिया इस मामले की जाँच करने को तैयार नहीं हैं. इस तबादले के बाद मीडिया में आई ख़बरों की वजह से गृह विभाग की काफ़ी आलोचना हो रही है.

इन आलोचनाओं से बचने के लिए मामला सीबीआई को सौंप दिया गया है.

(वाईपी सिंह से बीबीसी के अश्विन अघोर की बातचीत पर आधारित)

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