'एकांतवास' को लेकर भूख हड़ताल पर जुंदाल

मुंबई में हुए हमले

मुंबई में 2008 में हुए चरमपंथी हमलों के अभियुक्त ज़ैबुद्दीन अंसारी उर्फ़ अबु जुंदाल चालीस दिनों से भूख हड़ताल पर है.

ऑर्थर रोड जेल में क़ैद जुंदाल की मांग हैं कि उन्हें 'एकांतवास' से निकालकर बाक़ी क़ैदियों के साथ रखा जाए.

उनके वकील आसिफ़ नक़वी का कहना है कि भूख हड़ताल ख़त्म न होने पर जुंदाल की जान को ख़तरा हो सकता है.

हालांकि जेल अधिकारी जुंदाल के वकील के आरोपों को नकारते हैं.

आईजी जेल बिपिन कुमार सिंह का कहना है कि जहां जुंदाल को रखा गया है वहां अन्य क़ैदी भी हैं.

जेजे अस्पताल के डीन पीटी लहाने ने बीबीसी को बताया कि पंद्रह दिन पहले जुंदाल को इलाज के लिए लाया गया था और जुंदाल के तमाम चिकीत्सीय परीक्षणों की रिपोर्ट सामान्य थी.

'वज़न कम हुआ'

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उधर जुंदाल के वकील आसिफ़ नक़वी के मुताबिक जुंदाल का वजन 14 किलो कम हो गया है और अब वो बिना सहारे के चल भी नहीं सकते हैं.

नक़वी ने शुक्रवार को जुंदाल से मुलाक़ात की थी. उन्होंने बीबीसी से कहा, "अगर सुरक्षा की वजह से जुंदाल को एकांत में रखा जा रहा है तो उन्हें अंडाकार सैल में भी रख सकते हैं."

जुंदाल ने 5 अगस्त को मकोका कोर्ट में अर्ज़ी दायर कर बाक़ी बंदियों के साथ रखने की मांग की थी.

हाई कोर्ट में चुनौती

2014 में सर्वोच्च न्यायालय ने अपने एक फ़ैसले में कहा था कि किसी क़ैदी को फांसी की सज़ा होने और तमाम क़ानूनी विकल्प इस्तेमाल करने के बाद ही एकांत में रखा जा सकता है.

नक़वी ने मकोका कोर्ट को हाई कोर्ट में भी चुनौती दी है, जहां सोमवार को सुनवाई होगी.

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