दूध-चना के दम पर ग्राउंड में हॉकी

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Image caption हॉकी खेल के प्रति युवाओं का लगाव होना बेहद जरूरी है

लगातार अनदेखी हो रही हॉकी से बच्चों को जोड़ने की पहल करते हुए संस्था 'वन थाउज़ेंड लीग' ने देश भर में लगभग साढ़े तीन हज़ार बच्चों को हॉकी स्टिक थमाई है.

पिछले 13 साल से हॉकी पर काम कर रहे और इस पर कई किताबें लिख चुके के अरुमुगम ने स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति लेकर बच्चों को हॉकी सिखाने का बीड़ा उठाया है.

हॉकी से प्यार

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Image caption हॉकी के लिए प्यार और उसमें सफलता के लिए जुनून

अरुमुगम ने 'वन थाउज़ेंड लीग' में हॉकी खिलाड़ियों को एक साथ जोड़ा.

अरुमुगम को इस बात का दुख है कि जो देश हॉकी में दशकों तक दुनिया का सिरमौर रहा, वह अब ओलंपिक में क्वालीफाई करने के लिए भी जूझता है.

इसी के चलते उन्होंने दिल्ली के सरकारी स्कूल के बच्चों के साथ हॉकी को आगे बढ़ाने का फैसला किया है.

सरकारी स्कूलों में हॉकी

अब अरुमुगम के प्रयास से दिल्ली के लगभग 24 स्कूलों में हॉकी खेली जा रही है जिसमें जूनियर, सब-जूनियर सीनियर टीमें हैं

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Image caption वन थाउसंड हॉकी लीग

इसके आलवा पूरे भारत में तीन हज़ार बच्चे इस संस्था के ज़रिए हॉकी से जुड़े हैं जिसमे से दिल्ली में डेढ़ हज़ार बच्चे हैं.

दसवीं कक्षा में पढ़ने वाले राम कुमार का कहना है कि जब नेशनल खेलने गए थे तो पहली बार ट्रैन में बैठे, तो मज़ा आया.

राम कुमार कहते हैं, "हमारे पास पास जूते नहीं थे, हॉकी स्टिक नहीं थी, सब कुछ सर ने दिया."

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Image caption दिल्ली में हॉकी के लिए कोई सुविधाये नहीं हैं

राम कुमार के पिता की दिल्ली में सब्ज़ी की दुकान है. आगे चल कर राम कुमार हॉकी में नाम कमाना चाहते हैं.

दूध-चना और हॉकी

अरुमुगम हर रोज सुबह-शाम बच्चों को हॉकी खिलाते हैं उनको खाने के लिए दूध, चना भी देते हैं.

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Image caption हॉकी का कल्चर लाना चाहते हैं

अरुमुगम को बच्चों को हॉकी से जोड़ने से कड़ी मेहनत करनी होती है.

इस क्रम में उन्हें बच्चों के माता-पिता को राजी करना होता है और स्कूल में जाकर प्रिंसिपल से भी बात करनी होती है.

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Image caption हॉकी से प्यार है

अरुमुगम का मानना है कि हॉकी को बढ़ाना उनका मकसद है और इसी के लिए आगे काम करना चाहते हैं.

अरुमुगम सरकार से कुछ ख़ास नहीं चाहते. वह कहते हैं, "सरकार से सिर्फ ग्राउंड मिल जाए ताकि बच्चों को वहाँ अभ्यास कराया जा सके."

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