अमरीका में मोदी का विरोध मेरे कहने पर: हार्दिक

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गुजरात में पटेल समुदाय के आंदोलन का नेतृत्व करने वाले युवा नेता हार्दिक पटेल बिहार से लेकर अमरीका तक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का खेल बिगाड़ने पर तुले नज़र आते हैं.

बिहार में अगले महीने पांच चरणों में होने वाले विधानसभा चुनाव के दौरान हार्दिक चार रैलियां करेंगे. इससे भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाले एनडीए गठबंधन को नुकसान हो सकता है.

कैलिफ़ोर्निया में प्रधानमंत्री के दौरे के समय पटेल समुदाय के विरोध को बढ़ावा देकर वह प्रधानमंत्री चिंता बढ़ा सकते हैं. प्रधानमंत्री कुछ दिनों में सिलिकॉन वैली और न्यूयॉर्क का दौरा करने वाले हैं.

हार्दिक पटेल बिहार में 11 अक्टूबर से 31 अक्टूबर के बीच रैली करेंगे. बिहार विधानसभा चुनाव 12 अक्टूबर से 5 नवंबर के बीच होने हैं.

'मेरे कहने पर अमरीका में विरोध'

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अहमदाबाद से बीबीसी को दिए एक इंटरव्यू में हार्दिक पटेल ने कहा, "पटेल, कुर्मी और अन्य पिछड़ी जातियों की इन रैलियों का मक़सद ये बताना है कि गुजरात में पटेल समुदाय के साथ क्या हुआ है, किस तरह की समस्या है उन्हें."

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार कुर्मी जाति के हैं और हार्दिक पटेल कुर्मी और पटेल को एक ही जाति मानते हैं.

तो क्या विधानसभा के चुनाव के समय कुर्मियों और पटेलों की रैलियों से नीतीश कुमार को फायदा होगा?

हार्दिक कहते हैं कि इन रैलियों का मक़सद किसी को फ़ायदा या नुक़सान पहुंचाना नहीं है.

वे कहते हैं,"हम नीतीश कुमार को समर्थन देने के लिए रैली नहीं कर रहे हैं. मैं किसी राजनीतिक पार्टी से जुड़ा नहीं हूं. अब कोई ऐसा सोचे तो मैं क्या करूं, मेरा दिल साफ़ है."

हार्दिक कहते हैं कि अमरीका की सिलिकॉन वैली और न्यूयॉर्क में मोदी की जल्द शुरू होने वाली यात्रा के खिलाफ पटेलों का विरोध उनके कहने पर ही हो रहा है.

उन्होंने कहा, "मैंने ही उनसे विरोध करने को कहा है. इसमें हज़ारों लोग भाग ले रहे हैं."

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इसकी वजह बताते हुए हार्दिक कहते हैं, "गुजरात की अगस्त रैली में पटेल महिलाओं और बच्चों के साथ अत्याचार और उनकी हत्या के मामले को लेकर अमरीका के पटेल उनका विरोध कर रहे हैं. मैं मानता हूँ कि ये विरोध होना चाहिए."

'फ़ोकस बिहार'

बिहार की रैलियों को लेकर पटेल या पाटीदार आंदोलन में फूट की ख़बरें आ रही हैं.

अहमदाबाद के वरिष्ठ पत्रकार अजय उमट कहते हैं, "कई संयोजक हार्दिक पटेल के खिलाफ बग़ावत पर उतर आए हैं. बागी संयोजक चाहते हैं कि वह सरकार से पटेलों के लिए आर्थिक पैकेज की बात करें. लेकिन हार्दिक पटेल समुदाय को ओबीसी दर्जा दिलाने की अपनी मांग पर अड़े हैं."

हार्दिक पटेल आंदोलन में फूट की ख़बर पर कहते हैं, "कुछ लोग पहले से ही केवल सभाओं में ही आते थे. उनको हम साथ लेकर नहीं चल रहे हैं. वो केवल चार-पांच ही लोग हैं."

बिहार में रैलियों से पहले हार्दिक पटेल 27 सितम्बर को झारखण्ड की राजधानी रांची में रैली करने वाले हैं. उनका दावा है कि इसमें दो से ढाई लाख लोग भाग लेंगे.

उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश, दिल्ली, लखनऊ, मुंबई समेत कई और स्थानों पर उनकी रैली होगी. लेकिन फोकस बिहार होगा जहां वह चार रैलियां करेंगे.

बिहार में पहली रैली पटना में होगी. उनके अनुसार अन्य स्थानों का चयन अभी नहीं हुआ है.

हार्दिक बताते हैं, "हमने पटेल नवनिर्माण सेना संगठन बनाया था. इसकी शाखाएं अब 16 राज्यों में है. ये रैलियां यही संगठन करा रहा है".

"पूरे हिंदुस्तान के 27 करोड़ कुर्मी-पटेल- गुर्जर समाज को हम एकजुट करेंगे और गुजरात में आरक्षण की जो लड़ाई हम लड़ रहे हैं इसके लिए हम सब एकजुट होंगे."

'व्यक्ति के ख़िलाफ़ नहीं'

22 साल के हार्दिक पटेल ने पटेल समुदाय के आरक्षण की मांग को लेकर जुलाई में आंदोलन शुरू किया था.

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25 अगस्त के दिन अहमदाबाद में महारैली में हिंसा हुई थी जिसमें 10 लोगों की मौत हो गई थी. कुछ दिन पहले हार्दिक को बग़ैर इजाज़त के रैली निकालने पर गिरफ्तार कर लिया गया था.

अजय उमट कहते हैं कि गुजरात में लोगों का विचार है कि पाटीदार आंदोलन कमज़ोर पड़ता जा रहा है. लेकिन हार्दिक पटेल कहते हैं कि अब आंदोलन में लाखों महिलाएँ शामिल हो गई हैं. वह राजकोट में पटेल महिलाओं की एक विशाल रैली की तैयारी भी कर रहे हैं.

हार्दिक के खिलाफ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विरोधियों के हाथ में कठपुतली होने का भी आरोप है. इस पर उनका कहना था कि वह सिस्टम के खिलाफ हैं किसी व्यक्ति के नहीं.

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