सोशल ऐप्स की सरकारी ताक झांक पर मचा बवाल

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सोमवार को केंद्र सरकार ने नेशनल इन्क्रिपशन पॉलिसी का मसौदा जारी किया. इसके जारी होते ही अधिकतर मीडिया संस्थानों ने ख़बर चलाई कि अब फ़ोन पर सभी मैसेजेज़ 90 दिनों तक सुरक्षित रखने होंगे.

इसमें व्हाट्स ऐप, वाइबर, स्काइप, वीचैट जैसे अन्य सोशल मैसेजिंग सर्विसेज़ को शामिल किए जाने की ख़बरें भी आईं.

नए क़ानून के तहत अगर कोई ऐसा नहीं करता है तो उसे जेल भी हो सकती है. इस ख़बर के आते ही सोशल मीडिया पर केंद्र सरकार की आलोचना शुरू हो गई.

फ़ेसबुक और ट्विटर पर कई हैशटैग ट्रेंड करने लगे.

फ़ेसबुक पर #ModiDontReadMyWhatsApp ट्रेंड शुरू हुआ. वहीं ट्विटर पर Encryption Policy ट्रेंड करने लगा.

बदले सुर

आलोचना शुरू होते ही सरकार ने अपने बचाव में एक और बयान जारी किया. सरकार ने सफ़ाई में कहा कि अभी कोई नियम नहीं बना है, केवल जनता से राय मांगी गई है.

सरकार ने कहा कि 16 अक्तूबर तक लोगों से कहा गया है कि वो सरकार को बताएं कि आख़िर यह मसौदा कैसा होना चाहिए.

चौतरफ़ा आलोचना

इस बीच कांग्रेस नेता मनीष तिवारी ने ट्वीट किया, "इन्क्रिपशन नीति के तहत सरकार लोगों पर जासूसी करना चाहती है. अब इसके बाद सरकार को इस बात का वीडियो चाहिए होगा कि हम अपने बेडरूम में 90 दिनों तक क्या कर रहे हैं."

वहीं एक अन्य यूज़र महेंद्र राणा ने लिखा, "बेवक़ूफ़ी की हद है. केवल बेवक़ूफ़ क़िस्म के लोग ही ऐसी नीति लागू कर सकते हैं."

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