मद्रास हाईकोर्ट में हंगामा, 'दहशत' में जज

भारत के मुख्य न्यायाधीश एचएल दत्तू को मद्रास हाई कोर्ट के जजों के भीतर व्याप्त दहशत को दूर करने के लिए कुछ करना ही था.

ऐसा लगा कि तमिलनाडु बार एसोसिएशन उन वकीलों के ख़िलाफ़ कार्रवाई करने से पीछे हट रहा है जिनके कथित तौर पर आपत्तिजनक व्यवहार के चलते कोर्ट की गरिमा को ठेस पहुंची. बताया जा रहा है कि इस तरह की घटना यहां पहले कभी नहीं हुई.

प्रदर्शनकारी वकीलों ने जजों के ख़िलाफ़ नारे लगाए, अपशब्दों का प्रयोग किया और फिर कोर्ट परिसर में ही बैठ गए.

उधर, तमिलनाडु में वकीलों की हड़ताल की आशंका एक बार फिर बनी हुई है क्योंकि 15 निलंबित वकीलों की सहायता के लिए वकीलों का एक समूह उनके समर्थन में खड़ा है.

हालांकि प्रदर्शनकारी वकील अपने समर्थन के लिए वकीलों की कई संस्थाओं का समर्थन जुटाने की कोशिश कर रहे हैं लेकिन वकीलों का एक समूह बार एसोसिएशन की ओर से 15 वकीलों को निलंबित करने के फ़ैसले को सही ठहरा रहा है.

16 सितंबर को करीब सौ वकीलों ने मद्रास उच्च न्यायालय के भीतर नारे लगाए थे. कुछ वकीलों का कहना है कि ये इस पेशे की संस्कृति के ख़िलाफ़ है.

उस दिन मद्रास उच्च न्यायालय में जो कुछ भी हुआ उसकी चर्चा पूरे भारत में, ख़ासकर न्यायिक जगत में हुई. ख़ुद भारत के मुख्य न्यायाधीश एचएल दत्तू ने भी इसकी निंदा की.

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उनका कहना था, “मद्रास हाई कोर्ट के जज कोर्ट परिसर में दहशत में हैं. इस बात का हर समय अंदेशा बना हुआ है कि वकील कभी भी नारे लगाते हुए कोर्ट परिसर में दाख़िल हो सकते हैं. अदालत में इतने निम्न स्तर का माहौल कभी नहीं रहा. कुछ दिन पहले ही मेरी मद्रास उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश से लंबी वार्ता हुई है.”

गुरुवार को बार काउंसिल ऑफ़ इंडिया ने एक अभूतपूर्व फ़ैसला लिया और तमिलनाडु के 15 वकीलों को उनके ख़राब बर्ताव के चलते निलंबित कर दिया. इनके समर्थन में वकील हड़ताल पर जाने की धमकी दे रहे हैं.

समर्थक वकील पूरे राज्य में न्यायिक व्यवस्था को बाधित करने की योजना बना रहे हैं.

मद्रास हाई कोर्ट एडवोकेट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष पीटर रमेश कुमार भी निलंबित वकीलों में से एक हैं. वो कहते हैं, “बार काउंसिल ऑफ़ इंडिया ने तमिलनाडु बार काउंसिल की शक्तियों को हड़प लिया है. राज्य में किसी भी वकील के ख़िलाफ़ कार्रवाई करने का अधिकार सिर्फ तमिलनाडु बार काउंसिल को ही. बार काउंसिल ऑफ़ इंडिया का आदेश अवैध है.”

इन वकीलों को गत 14 सितंबर को निलंबित किया गया था जब ये अदालत परिसर में तमिल को हाई कोर्ट की आधिकारिक भाषा बनाए जाने की मांग को लेकर नारेबाज़ी कर रहे थे.

रमेश कुमार कहते हैं कि निलंबित वकील कर्नाटक बार काउंसिल के एक सत्र में शामिल होने वाले हैं जो कि चार अक्टूबर को वकीलों के खिलाफ़ लगे आरोपों की जांच करने वाली है.

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कुछ ऐसा ही मामला मानवाधिकार के एक वरिष्ठ वकिल के खिलाफ भी आया था. लेकिन चेन्नई में वकील बिरादरी का एक तबका ऐसा भी है जो बीसीआई के फ़ैसले का स्वागत कर रहा है. उसका कहना है कि वकीलों को ये समझना होगा कि क़ानून को अपने हाथ में लेने से क्या होता है.

महिला अधिकार से जुड़ी कार्यकर्ता और वरिष्ठ वकील सुधा रामलिंगम कहती हैं, “यदि तमिलनाडु बार काउंसिल अपने सदस्यों को अनुशासन में नहीं रख पा रही है और वे लोग आपत्तिजनक कार्यों में लिप्त हैं. चूंकि तमिलनाडु बार काउंसिल अपने कर्तव्यों को निभाने में असफल रही है इसलिए बीसीआई को आगे आना पड़ा है.”

वहीं निलंबित विधायकों का कहना है कि उन्हें अभी भी निलंबन से संबंधित औपचारिक नोटिस का इंतज़ार है.

तमिलनाडु बार काउंसिल ने बीसीआई से इस आदेश पर पुनर्विचार की अपील की है. इस बारे में बार काउंसिल के सदस्य राज्य के मुख्य न्यायाधीश एसके कौल से भी इस बारे में मिलने वाले हैं.

रमेश कुमार के मुताबिक रविवार को लायर्स एसोसिएशन की तिरुचिरापल्ली में बैठक होने वाली है और इस बैठक में विरोध प्रदर्शन की योजना को अंतिम रूप दिया जाएगा.

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