ज़्यादा बोनस पाने के तरीके

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अगर आप खुद को काफी मेहनती मानते हैं तो निश्चित तौर पर साल के अंत में आपको बोनस का इंतजार होगा.

वैसे भी आर्थिक मंदी का साया अब दूर होता जा रहा है. बीते कुछ सालों में तो कर्मचारी नौकरी को सुरक्षित रखने में ही लगे हुए थे. लेकिन कुछ समय बीतने के बाद कामकाजी पेशेवर वेतन-बोनस की चिंता में फिर लग गए हैं.

वर्ल्डएटवर्क के एक अध्ययन के मुताबिक पेशेवरों के लिहाज से बीते एक दशक का ये सबसे बेहतर समय है, जिसमें कंपनियां अपने कर्मचारियों को बेहतर बोनस और सुविधाएं दे रहीं हैं या फिर देने की स्थिति में हैं.

कंपनियों की स्थिति सुधरी

इस अध्ययन के मुताबिक 2009 की आर्थिक मंदी के बाद कर्मचारियों के बोनस और सुविधाओं में कटौती हुई थी. 2010 में बोनस पर होने वाला खर्च 54 फ़ीसदी रह गया था, जबकि स्पॉट अवार्ड के लिए 34 फ़ीसदी और रिटेंशन बोनस 25 फ़ीसदी था.

लेकिन 2014 के बाद अब साइन-इन बोनस पर होने वाला खर्च 74 फ़ीसदी हो गया है. स्पॉट अवार्ड पर होने वाला खर्च 60 फ़ीसदी और रिटेंशन बोनस पर होने वाला खर्च 51 फ़ीसदी तक पहुंच गया है.

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हालांकि ऐसा भी नहीं होगा कि आपने बोनस मांगा और कंपनी ने आपको दे दिया.

सीएनबीसी की कंज्यूमर रिपोर्टर कैली ग्रांट के मुताबिक आपको अपनी वेतन सुविधाओं का आकलन करना चाहिए. कई ऑनलाइन वेबसाइट इसमें आपकी मदद कर सकती हैं. मसलन ग्लासडोर डॉट कॉम या फिर पेस्केल डॉट कॉम. इन सबकी मदद से आप को अंदाजा हो सकता है कि आप को कम भुगतान तो नहीं मिल रहा.

मैनेजर से कीजिए बात

कैली ग्रांट के मुताबिक इसके अलावा आपको अपनी कंपनी के वित्तीय साल पर नज़र रखनी चाहिए. वित्तीय साल पूरा होने से एक या दो महीने पहले बोनस की मांग का सबसे उपयुक्त समय है. इस वक्त मैनेजर तय करते हैं कि अगले वित्तीय वर्ष में कहाँ पर कितना ख़र्च करना है.

लेकिन इसके लिए आपको अपने मैनेजरों से मिलने का वक्त लेना चाहिए और उनके पास अपनी मांग को सटीक ढंग से रखना चाहिए.

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इस मुलाकात को आप ये बताने के लिए भी इस्तेमाल कर सकते हैं कि आपकी क्या क्या क्षमताएँ संस्था के किस किस काम आ सकती हैं और आप किन किन नई ज़िम्मेदारियां को निभा सकते हैं.

आप अपनी वजह से कंपनी को होने वाले मुनाफे की बात भी कर सकते हैं. इसके अलावा टारगेट को पूरा करने को भी चिन्हित करें.

लेकिन इन सबसे अहम यह है कि आपको अपनी कंपनी की बोनस स्कीम के बारे में भी जानकारी होनी चाहिए. संभव हो तो आप अपने मैनेजरों से अपनी क्षमता साबित करने का मौका मांगिए, क्योंकि आजकल कंपनियां बेहतर काम करने वालों को अच्छा रिवॉर्ड देने में कंजूसी नहीं बरत रही हैं.

अंग्रेज़ी में मूल लेख यहाँ पढ़ें, जो बीबीसी कैपिटल पर उपलब्ध है.

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