आने वाले समय का 'रियल गोल्ड' क्या है?

इमेज कॉपीरइट THINKSTOCK

आपकी नज़र में दुनिया का बेशकीमती संसाधन क्या है?

पेट्रोलियम, सोना, प्लैटिनम या फिर कुछ और....

आपका जवाब जो भी हो, एक जाने-माने इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट ऑइन फाहे का भी जवाब सुन लीजिए.

वो बिना हिचकिचाए कहते हैं- "बिना समझबूझ वाले व्यक्ति को भी स्पष्ट होना चाहिए कि दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण और ज़रूरी तत्व पानी है."

आप भले अचरज में पड़ गए हों लेकिन ध्यान दीजिए कि पेट्रोलियम की गिरती कीमते जून 2014 में 107 डॉलर प्रति बैरल से गिरकर आज 45 डॉलर प्रति बैरल रह गई है.

यही नहीं, पीने का स्वच्छ पानी दुनिया में सीमित है. पृथ्वी पर कुल पानी का केवल 1 प्रतिशत और वो भी धीरे-धीरे कम हो रहा है.

विकासशील देशों में रहने वाले अधिकतर लोग अभी स्वच्छ पानी की उपलब्धता को गंभीरता से नहीं ले रहे हैं. उनमें से अनेक लोगों को लगता है कि नल खोला और पानी मिल गया.

इमेज कॉपीरइट THINKSTOCK

लेकिन पानी की उपलब्धता लगातार घट रही है.

पानी संबंधी शेयरों पर 100 फ़ीसदी रिटर्न

ऑइन फाहे डब्लिन स्थित इन्वेस्टमेंट फर्म क्लेनवॉर्ट बेनसन इन्वेस्टर्स के मुख्य अर्थशात्री भी हैं. उन्होंने अपना करियर पानी से जुड़े निवेश के अध्ययन करके ही बनाया है.

कुछ वजहों से पानी का सेक्टर निवेश के लिए आदर्श है.

फाहे कहते हैं, "पानी की आपूर्ति सीमित है और आप प्राकृतिक तेल और जीवाश्म ईंधन के बिना रह सकते हैं, लेकिन पानी के बिना जीवन संभव नहीं है. इस लिहाज से यह निवेश के लिए उपयुक्त है."

पानी में निवेश लगातार बढ़ रहा है और पानी को बचाने, साफ़ करने और इसकी तकनीक विकसित करने से जुड़े स्टॉक्स में 100 फ़ीसदी तक रिटर्न मिल रहा है. फाहे के मुताबिक आने वाले दिनों में इस क्षेत्र में अवसर और बढ़ेंगे.

इमेज कॉपीरइट Thinkstock

दरअसल समस्या ये नहीं है कि पृथ्वी पर पानी का अभाव है, लेकिन मुश्किल ये है कि साफ़ पानी उपलब्ध नहीं है. अमेरिका एनवायरमेंटल प्रोटेक्शन एजेंसी के मुताबिक उपलब्ध पानी में महज एक फ़ीसदी पानी ही इंसान प्रयोग में ला सकता है.

दुनिया भर में मौजूद पानी में 97 फ़ीसदी खारा पानी है. इसे साफ़ करने का संयंत्र लगाना आज भी बेहद मुश्किल और महँगा है. प्रदूषण और बढ़ती आबादी के साथ-साथ पानी की मांग भी लगातार बढ़ रही है. खेती किसानी से लेकर ऊर्जा उत्पादन तक और स्वास्थ्य सुविधाओं से लेकर उत्पादन तक के चलते, साफ़ पानी की आपूर्ति कम होती जा रही है.

साफ़ पानी का संकट

अमरीका के कैलिफोर्निया में कई साल से सूखा पड़ रहा है और पानी का संकट गहराता जा रहा है. वहीं दूसरी ओर चीन में भी पीने के पानी का संकट बढ़ रहा है.

संयुक्त राष्ट्र में पानी के मुद्दे पर सलाहकार और चीन स्थित आरबीसी कैपिटल के एनडी डियान ड्रे कहते हैं, "स्थिति ख़राब हो रही है, इसमें कोई शक नहीं है."

ड्रे के मुताबिक चीन की शहरी आबादी संयुक्त राष्ट्र के आकलन के मुताबिक 2014 से 2050 के बीच करीब 29.2 करोड़ बढ़ेगी. इसका दबाव मौजूदा इंफ्रास्ट्रक्चर पर पड़ेगा.

चीन में पानी की आपूर्ति का अधिकांश हिस्सा नदी और जलप्रपात हैं और इनमें से आधे प्रदूषित हो चुके हैं. ड्रे के मुताबिक चीन में इस्तेमाल होने वाले पानी के स्रोत दक्षिण में स्थित हैं और अधिकतर आबादी उत्तर में रहती है. मैकेंज़ी की एक रिपोर्ट के मुताबिक इस चुनौती का सामना करने के लिए चीन को अरबों डॉलर खर्च करने होंगे.

इमेज कॉपीरइट Getty

इसके अलावा भारत, ऑस्ट्रेलिया, इसराइल, जॉर्डन, संयुक्त अरब अमीरात और अफ्रीका भी जल संकट का सामना कर रहे हैं. दुनिया भर की आबादी जिस तरह से बढ़ रही है उससे कनाडा, रुस और ब्राज़ील जैसे पर्याप्त पानी के स्रोतों वाले देशों में भी संकट बढ़ रहा है.

पानी में निवेश

संघर्षों से बचने के लिए सरकार को पानी की कमी को दूर करना होगा. ऐसे में पानी के क्षेत्र में निवेश के मौके भी बढ़ेंगे. फाहे के मुताबिक निवेश के लिहाज से पैसा उन कंपनियों में लगाना चाहिए जो पानी की गुणवत्ता सुधारने के लिए काम कर रही हैं.

यह संभव है कि कंस्ट्रक्शन कंपनियां ही विकासशील देशों में कई जल संयंत्र स्थापित कर रही हों. इस बारे में ज़्यादा जानकारी के लिए ग्लोबल वाटर इंटेलिजेंस की रिपोर्ट देखनी चाहिए.

इमेज कॉपीरइट Thinkstock

हालांकि यह लंबे समय में फ़ायदे का सौदा है. एसएंडपी ग्लोबल वाटर इंडेक्स दुनिया भर की 50 कंपनियों पर नज़र रखता है जो पानी से जुड़े कारोबार करती हैं.

इनमें पांच साल का सालाना रिटर्न 8 फ़ीसदी से ज़्यादा है जबकि तीन साल में यह 7 फ़ीसदी रहा. यह बहुत आकर्षक तो नहीं है लेकिन लंबे समय के निवेश के लिहाज से ये बेहतर विकल्प है.

फाहे के मुताबिक अमरीकी वाटर वर्क्स और डानहेर कॉरपोरेशन के शेयर बीते पांच साल के दौरान 121 फीसदी बढ़े हैं.

बेहतर है रिटर्न

एक ओर जहां कुछ कंपनियां शानदार रिटर्न दे रहीं हैं वहीं कुछ को नुकसान भी उठाना पड़ रहा है. इन दो कंपनियों से ये अनुमान नहीं लगाना चाहिए कि सभी कंपनियां काफी मुनाफ़ा देंगी.

निवेश करते वक्त इस बात का भी ख्याल रखना चाहिए कि कंपनियां दूसरे क्षेत्र में भी कारोबार कर रही होंगी. जैसे डानेहर के कुल कारोबार का महज 12 फ़ीसदी ही जल के क्षेत्र में है.

इमेज कॉपीरइट Reuters

ऑस्ट्रेलिया में निवेशक सीधे उन फंडों को ख़रीद सकते हैं जो नदी और झील पर स्वामित्व रखते हैं. ऑस्ट्रेलियाई इन्वेस्टमेंट फर्म विक्टोरिया के जेनरल मैनेजर युआन फ्राइडे बताते हैं कि ऑस्ट्रेलिया में पानी से संबंधित निवेश और कारोबार की शुरुआत 1990 के दशक से हुई थी.

फ्राइडे की फर्म कई बेसिन का एक फीसदी जल संसाधन का स्वामित्व रखती है और अपने निवेशकों को इस संसाधन से होने वाली रेंटल आमदनी से मुनाफ़ा देती है.

दुनिया के दूसरे देशों में भी पानी का कारोबार और उससे संबंधित निवेश का सेक्टर लगातार बढ़ रहा है.

अगले 10 से 20 साल के दौरान ये सबसे बेहतर रिटर्न देने वाला निवेश साबित हो सकता है.

अंग्रेज़ी में मूल लेख यहाँ पढ़ें, जो बीबीसी कैपिटल पर उपलब्ध है.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

संबंधित समाचार