जम्मू में ही जगह मिले तो छोड़ देंगे ज़मीन: सेना

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भारत प्रशासित जम्मू-कश्मीर में राज्य सरकार ने सेना के क़ब्ज़े वाली ज़मीनेें ख़ाली करने के लिए कहा है.

सेना जम्मू एयरपोर्ट के आस-पास अपने क़ब्ज़े वाली ज़मीन ख़ाली करने पर तैयार हो गई है. अब इस ज़मीन को एयरपोर्ट को बेहतर बनाने के लिए काम में लाया जाएगा.

सेना जम्मू विश्वविद्यालय के पास वाली ज़मीन को भी वापस देगी, जिसके बदले सेना को दूसरी जगह पर ज़मीन दी जाएगी.

उधमपुर में सेना के प्रवक्ता कर्नल गोस्वामी ने बीबीसी को बताया, "अगर जम्मू में ज़मीन के बदले ज़मीन दी जाएगी तो हमें कोई आपत्ति नहीं. लेकिन इस बात पर हम तैयार नहीं है कि जम्मू के बदले में हमें डोडा या किश्तवाड़ में ज़मीन दी जाएगी, यह हमें मंज़ूर नहीं."

सरकार का फ़ैसला

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29 सितम्बर को श्रीनगर में आयोजित नागरिक-सेना संपर्क(सिविल मिलिट्री लियेज़ोन) की बैठक में मुख्यमंत्री मुफ़्ती मोहम्मद सईद ने भारतीय सेना के अधिकारियों को तीन महीने के अंदर ज़मीनें ख़ाली करने के लिए कहा है.

राज्य सरकार ने जनवरी 2015 के विधानसभा सत्र में बताया था कि जम्मू कश्मीर में भारतीय सुरक्षा बलों ने 1,70,696 कनाल और 7 मरला ज़मीन पर नाजायज़ क़ब्ज़ा किया है जो कि 2,83,028.764 वर्ग किलोमीटर ज़मीन पर फैला हुआ है.

राज्य के सूचना विभाग के एक बयान में कहा गया है, "मुख्यमंत्री ने सेना को श्रीनगर के टोटो ग्राउंड और अनंतनाग के हाई ग्राउंड को तीन महीने के अंदर-अंदर ख़ाली करने का समय दिया है."

बयान में कहा गया है कि टोटो ग्राउंड और हाई ग्राउंड में जो ज़मीन सेना के क़ब्ज़े में है उसको आम लोगों की ज़रूरत के लिए इस्तेमाल किया जाएगा.

करगिल में ज़मीन पर चर्चा

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बैठक में करगिल के खुर्बतोंग में भी सेना के क़ब्ज़े वाली ज़मीन को ख़ाली कराने पर चर्चा हुई.

इस पर आने वाले समय में सेना और लद्दाख़ हिल काउन्सिल इस मुद्दे पर अंतिम फ़ैसला लेगी जिसकी रिपोर्ट राज्य सरकार को जल्द से जल्द समय में सौंपी जाएगी.

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राज्य के सूचना विभाग के बयान में मुख्यमंत्री के हवाले से कहा गया है कि अब भारत प्रशासित जम्मू-कश्मीर में ज़मीनी हालात बेहतर हैं और अब राज्य के अंदरूनी हालात में सेना के रोल की ज़रूरत कम हो गई है.

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