बिहार की आधी आबादी को कब मिलेगी भागेदारी?

बिहार की राजनीति मे महिलाओं की भागीदारी लगातार बढ़ी है.

पिछले लोकसभा चुनाव में ऐसे बहुत सारी सीटें रही, जहाँ महिलाओं का मतदान प्रतिशत पुरुष मतदाताओं से अधिक रहा.

सभी राजनीतिक दलों को आधी आबादी के समर्थन का महत्व पता है, बावजूद इसके सभी बड़े राजनीतिक दलों ने उन्हें टिकट देने में कंजूसी दिखाई है.

वर्तमान विधानसभा में 14 फ़ीसदी महिला विधायक हैं. वहीं, इस बार प्रमुख दलों ने सिर्फ 10 फ़ीसदी महिलाओं को टिकट दिया है.

एनडीए ने अभी तक 23 और महागठबंधन के कोटे से 25 महिलाओं को टिकट मिला है.

एनडीए में भाजपा ने 154 में 14, हम ने 20 में से 4, लोजपा ने 32 में से 4 और रालोसपा ने अपने कोटे की 23 सीटों में से एक महिला को टिकट दिया है.

वहीं महागठबंधन के कोटे में जदयू ने 101 में 10, राजद 101 में 10 और कांग्रेस ने 41 में पांच महिलाओं को टिकट दिया है.

अभी तक सबसे अधिक हम ने 20 प्रतिशत और रालोसपा ने सबसे कम लगभग 4 प्रतिशत महिला उम्मीदवारों को चुनावी मैदान में उतारा है.

नीतीश कुमार ने अपने पहले कार्यकाल में एक नए तरह का राजनीतिक प्रयोग किया था, महिलाओं का सामाजिक- राजनीतिक और आर्थिक मॉडल का समन्वय, इसका फ़ायदा उन्हें मिला भी.

2010 के विधानसभा चुनाव में दोबारा सत्ता वापसी महिला मतदाता के अपार समर्थन के बिना संभव नहीं थी.

संक्षिप्त में कहा जाए तो नीतीश के “गुड गवर्नेंस ” की कहानी में महिलाओं से मिला विशाल जन समर्थन एक महत्वपूर्ण किरदार है.

डाटामइनएरिया से साभार

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