कुछ ग़लत लगेगा तो दख़ल देंगे: राम नाइक

इमेज कॉपीरइट PTI
Image caption मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के साथ राज्यपाल राम नाइक

उत्तर प्रदेश के राज्यपाल राम नाइक का कहना है कि अगर संविधान के दायरे में रहते हुए उन्हें कुछ ग़लत लगता है तो वे लगातार दख़ल देते रहेंगे.

उन्होंने हालांकि ये भी स्पष्ट किया कि राज्य सरकार से उनका कोई विवाद नहीं है.

दरअसल उत्तर प्रदेश में राज्यपाल और राज्य सरकार के बीच अक्सर तनातनी की ख़बरें आती रहती हैं, जबकि राम नाइक को राज्यपाल बने महज़ एक साल ही हुआ है.

केंद्र और राज्य में अलग दलों की सरकार होने की स्थिति में राजभवन और मुख्यमंत्री कार्यालय के बीच ऐसे विवाद नई बात नहीं हैं लेकिन लोकायुक्त की नियुक्ति और विधान परिषद में कुछ सदस्यों के मनोनयन के मामले में ये विवाद कुछ ज़्यादा ही उछला.

राज्यपाल इसे जहां संवैधानिक दायित्व कह रहे हैं तो राज्य सरकार इसे राज्यपाल की राजनीतिक सक्रियता बता रही है.

बीबीसी से ख़ास बातचीत में राम नाइक ने बताया कि लोकायुक्त के मामले में ये विवाद कुछ ज़्यादा चर्चा में रहा.

उनका कहना था, “लोकायुक्त मामले में जब प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया तो मैंने फ़ाइल वापस भेज दी, लेकिन सरकार ने राज्यपाल की आपत्ति पर विचार करने की बजाय लोकायुक्त की नियुक्ति से संबंधित क़ानून को ही बदलने की कोशिश की. लेकिन बाद में उसे फिर से पुरानी व्यवस्था पर ही लौटना पड़ा.”

लोकायुक्त मामला

इमेज कॉपीरइट httpupgovernor.nic.in

दरअसल, लोकायुक्त की नियुक्ति संबंधित फ़ाइल राजभवन और मुख्यमंत्री कार्यालय के बीच चार बार घूमती रही और आख़िरकार जिन जस्टिस रवींद्र यादव के नाम पर ये विवाद हो रहा था उन्होंने ख़ुद को इस प्रक्रिया से अलग कर लिया.

राम नाइक पर सत्तापक्ष की ओर से कई बार ऐसे आरोप लगे हैं कि वो कुछ ज़्यादा ही राजनीतिक सक्रियता दिखाते हैं. राज्यपाल ने कई बार ऐसी कुछ टिप्पणियां भी की हैं.

मसलन, एक बार उन्होंने सीधे तौर पर कहा कि पुलिस और प्रशासन के बड़े पदों पर यादव जाति के लोग ज़्यादा हैं. इसका सत्ता पक्ष की ओर से बाक़ायदा लिस्ट जारी कर खंडन किया गया.

इस सवाल पर राज्यपाल कहते हैं, “मैंने ऐसा नहीं कहा था बल्कि मैंने ये कहा था कि मेरे पास ऐसी शिकायतें आई हैं. और जब शिकायतें आती हैं तो ऐसी शिकायतों का मैं अपने स्तर से निपटारा करने का प्रयास करता हूं.”

राज्यपाल ने विधान परिषद के नौ सदस्यों के नामांकन से संबंधित फ़ाइलों पर भी आपत्ति जताई और बाद में पांच नामों को स्वीकृति दी. चार नाम अब भी उनके विचाराधीन हैं जिनके बारे में वो कहते हैं कि उन्होंने इस बारे में सरकार से जानकारी मांगी है, जब मिल जाएगी तब वो अपना निर्णय देंगे.

राजनीतिक सक्रियता

राज्यपाल राम नाइक की सक्रियता का अंदाज़ा इसी बात से लगाया जा सकता है कि एक साल के कार्यकाल में उन्होंने 44 हज़ार पत्रों के उत्तर दिए हैं, छह हज़ार लोगों से मुलाक़ात कर चुके हैं और सैकड़ों सभाओं में शिरकत की है.

इमेज कॉपीरइट PIB.NIC.IN

इस सवाल के जवाब में वो कहते हैं कि राजभवन में कोई भी व्यक्ति अपनी समस्या को लेकर आ सकता है और ये आंकड़े उसी का परिणाम हैं.

राज्यपाल राज्य के विश्वविद्यालयों के चांसलर होते हैं और कुलपतियों की नियुक्ति में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका होती है. राजनीतिक गलियारों में इस बात की भी चर्चा होती है कि राज्यपाल विश्वविद्यालयों में अपनी पसंद के कुलपति नियुक्त कर रहे हैं.

लेकिन राम नाइक इस आरोप को सिरे से नकारते हैं और कहते हैं कि इस तरह की एक भी शिकायत लिखित रूप में उनके पास नहीं आई है.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

संबंधित समाचार