डेंगू ने अंतरराष्ट्रीय बीमारी का रूप लिया

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दिल्ली के बड़े अस्पतालों में से एक बाड़ा हिंदू राव अस्पताल में रोज़ाना सैकड़ों लोग तेज़ बुख़ार और जोड़ों में ज़बरदस्त दर्द की शिकायत के साथ दाख़िल कराए जाते हैं.

यहां इस रोग को 'हाड़तोड़ बुख़ार' भी कहते हैं.

अस्पताल में सुरक्षा गार्ड तैनात कर दिए गए हैं, ताकि सब कुछ सुचारु रूप से चलता रहे.

फिर भी लोग डाक्टर से मिलने के लिए इतने परेशान होते हैं कि आपस में लड़ाई-झगड़े हो ही जाते हैं.

डेंगू का क़हर

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दिल्ली में इस बार डेंगू का क़हर बीते कई सालों में सबसे अधिक है. सरकारी आंकड़ों के मुताबिक़, इस साल भारत में अब तक 25 हज़ार लोग डेंगू रोग से पीड़ित हैं.

जबकि वास्तविक आंकड़ा इससे कई गुना अधिक होने का अनुमान है.

बड़े पैमाने पर रोग फैलने से अस्पतालों को कई बार कड़े फ़ैसले भी लेने होते हैं.

जिस दिन मैं वहां गया, डाक्टर सोनाली चतुर्वेदी इंचार्ज थीं, उन्हें ही यह तय करना था कि किसे भर्ती किया जाएगा.

डेंगू हेमोरेजिग

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उन्होंने मुझसे कहा कि वे दस में से नौ रोगियों को लौटा देती हैं. ज़्यादातर लोग एक-दो हफ़्ते की बीमारी के बाद ठीक भी हो जाते हैं.

पर कुछ लोगों का रोग ज़्यादा ख़तरनाक और जानलेवा बन जाता है. ऐसा तब होता है जब ख़ून ले जाने वाली नसों से प्लाज़्मा रिसने लगता है. इसे डेंगू 'हेमोरेजिक फ़ीवर' कहते हैं.

अस्पताल के मेडिकल डाइरेक्टर डाक्टर हेमंत शर्मा मुझे वार्ड के अंदर ले गए, जो डेंगू के मरीज़ों से पूरी तरह भरा हुआ था और कुछ बिस्तरों पर तो दो-दो मरीज़ थे.

ऑपरेशन रद्द

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डॉ. शर्मा ने मुझे बताया कि अस्पताल ने सारे इमर्जेंसी ऑपरेशन रद्द कर दिए हैं.

ऐसा इसलिए किया गया ताकि ज़्यादा से ज़्यादा वार्ड ख़ाली कराए जा सकें, जिनमें डेंगू के मरीज़ों को रखा जाए.

सभी डॉक्टरों से कह दिया गया है कि उन्हें तब तक कोई छुट्टी नहीं मिलेगी, जब तक डेंगू का प्रकोप कम नहीं हो जाता.

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डेंगू का प्रभाव सर्दी शुरू होने पर कम होगा, जब ठंड की वजह से मच्छर मरने लगेंगे. इसमें अभी कई हफ़्तों का समय है.

मैं बबीता बिष्ट से मिला. वे उस छोटी सी टोली की मुखिया हैं, जिसका काम एडीज़ मच्छरों को पनपने से रोकने के लिए जागरूकता फैलाना है.

वे मुझे बताती हैं कि बिल्कुल थोड़े से साफ़ पानी में भी ये मच्छर अंडे दे सकते हैं और पनप सकते हैं.

वे घर-घर जा कर लोगों को समझाती हैं कि किस तरह इन मच्छरों को रोका जा सकता है. एक घर में छोटा सा बर्तन मिला, जिसके पानी में एडीज़ के सैकड़ों लार्वा तैर रहे थे.

पूरी दुनिया में फैला रोग

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डेंगू दरअसल आधुनिकता से उपजी बीमारी है.

पचास साल पहले केवल कुछ देशों में ही डेंगू फैलता था. आज इसका प्रकोप दुनिया के 120 देशों में फैल चुका है.

परिवहन के साधनों के ज़रिए डेंगू के मच्छर पूरी दुनिया में फैल गए हैं. इसके साथ ही शहरीकरण और हर तरह के नए बसावटों से ये मच्छर फैलते गए, इनकी तादाद बढ़ती गई.

डेंगू की अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञ नीना वालेचा कहती हैं कि पिछले कई दशकों में डेंगू के मरीज़ों की संख्या तीस गुना बढ़ गई है.

10 करोड़ लोग प्रभावित

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डेंगू से मरने वालों की तादाद सौ में एक से थोड़ी अधिक है. लेकिन विश्व स्वास्थ्य संगठन का अनुमान है कि क़रीब 10 करोड़ लोग इससे प्रभावित होते हैं. यह एक बड़ी स्वास्थ्य समस्या है.

वालेचा आशंका जताती हैं कि यह रोग अभी और बढ़ेगा. जलवायु परिवर्तन से डेंगू के मच्छरों को फैलने में सहूलियत होगी. गर्मी और नमी बढ़ेगी तो इन मच्छरों की तादाद भी बढ़ेगी.

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