ब्लॉग: आख़िरकार 'दिव्य दृष्टि' मिल ही गई

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एक बार फिर हिंदुत्व को 'दिव्य दृष्टि' मिल गई है, इससे ख़ास तौर पर उन छिपी चीज़ों को देखा जा सकता है जिनसे धार्मिक भावनाएं आहत होती हैं.

इसका चर्चित सफल परीक्षण दादरी के एक मुसलमान के फ़्रिज में रखी चीज़ों को देखकर किया जा चुका है.

गोमांस के अगुवा निर्यातक देश में किसी के फ़्रिज में रखा गोश्त पहचान लेना कोई कमाल नहीं है.

'दिव्य दृष्टि' का असल सदुपयोग तब होगा जब आपके पेट में पड़ा कोई भी भोजन पहचान लिया जाएगा.

हिरण्यकश्यप विधि

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हिरण्यकश्यप विधि से उसे बाहर निकाल कर धार्मिक समीक्षा की जाएगी, अगर वह धार्मिक भावनाओं को आहत करने वाला हुआ तो आप को यूं ही फटा हुआ छोड़ दिया जाएगा, वर्ना आपको फिर से चलायमान कर दिया जाएगा.

तब तक मुर्दे को खड़ा करने वाली संजीवनी बूटी को खोजा जा चुका होगा.

उसी काल के पुष्पक विमान, ब्रह्मास्त्र, पानी में पत्थर तैराने वाली तकनीक का पुनरुद्धार करने में सरकारी वैज्ञानिक और कई वैज्ञानिक चेतना वाले मंत्री लगे हुए हैं.

एक नए सिस्टम की ज़रूरत तब पड़ेगी जब आपके पेट में पड़े प्याज़-लहसुन से जैनियों की धार्मिक भावनाएं आहत होंगी.

किसी देश के झंडे के रंग से मेल खाने के कारण धनिए का सेवन वर्जित कर दिया जाएगा.

दलितों आदिवासियों के पेट में पचते सुअर और गाय से मुसलमानों और हिंदुओं की भावनाएं एक साथ आहत होंगी.

हिंदुओं के भीतर ऊंची, मंझोली और पिछड़ी जातियों की धार्मिक भावनाएं घोंघा, मोर, केकड़ा, बंदर, बिल्ली, कछुओं का रूप धर कर आपस में टकराएंगी और वे बघनख लेकर एक दूसरे की घात में घूमने लगेंगी.

ख़ैर, तरक़्क़ी की रफ़्तार से तो यही लग रहा है कि तब इंडिया सुपर और डिजिटल दोनों क़िस्म का पावर हो चुका होगा.

इतने धर्म और जातियों का शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व संभव करने के लिए एक मनुस्मृति जैसी कठोर आचार संहिता क़ानून की शक्ल में लानी पड़ेगी.

धार्मिक भावनाएं

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अपने मोबाइल में लोड एप को सिर्फ़ एक बार क्लिक करके आप जान जाएंगे कि आपको कैसे जीना है.

आइए समझने की कोशिश करते हैं कि धार्मिक भावनाएं कैसे आहत होती हैं, दिव्य दृष्टि कैसे मिलती हैं और एक घायल धर्मयोद्धा को चंगा करके भारतमाता के वात्सल्य को पंखा झलती है.

तपस्या चलती रहती है, लेकिन दिव्य दृष्टि तभी मिलती है जब वह सत्ता हासिल करने, उसका विस्तार करने या दीर्घजीवी बनाने का लक्ष्य सामने हो.

एक बार वह मिली तो दिखा कि भगवान राम जहां पैदा हुए थे वह जगह एक मस्जिद के गुंबद के ठीक नीचे है. मामला अदालत में चल रहा था लेकिन धार्मिक भावनाएं आहत हो रही थीं, इसलिए कहा गया, बंद करो यह न्याय का नाटक, जन्मभूमि का खोलो फाटक, फाटक क्या पूरी मस्जिद ही ढहा दी गई.

भव्य राममंदिर का निर्माण आस्था का प्रश्न बन गया, फिर चुनाव दर चुनाव बहुमत का प्रश्न बना, जब छप्पर फाड़ बहुमत आया तो आध्यात्मिक रहस्य बनकर विकास के पानी में बह गया.

अथक परिश्रम

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हिंदुत्व की ताक़तों के अथक परिश्रम से दिल्ली में नरेंद्र मोदी की सरकार बनने के बाद 'दिव्य दृष्टि' फिर प्रकट हुई.

मंत्री, प्रचारक और थिंक टैंक उसके प्रभाव में व्याख्या करने लगे कि यह 'रामज़ादों' की सरकार है, देखने लगे कि देश की समस्याओं का समाधान हिंदुओं के कम से कम दस बच्चे पैदा करने में है, मुसलमान भी हिंदू ही हैं.

यह तीसरी आंख के इस्तेमाल का सलीक़ा नीचे तक पहुंचा और अब पैदल धर्मयोद्धा भी देखने लगे हैं कि आपके पेट में क्या है.

धर्मयोद्धाओं को बहुत दिनों से 'नमस्ते सदा वत्सले मातृभूमे' की वंदना के भावनात्मक आलोक में बताया जाता है कि उनकी सारी अतीत, वर्तमान, भविष्य की पराजयों, अपमान और समस्याओं का कारण सिर्फ़ एक है कि वे हिंदू हैं. इसलिए उन्हें अपना दुश्मन पहचानने में कोई दिक़्क़त नहीं होती.

मोतियाबिंद के मारे सेक्युलर उन्हें ताना देते हैं कि भारत को उन्हीं अंग्रेज़ों ने सैकड़ों साल तक ग़ुलाम बनाए रखा जिन्हें तुम अपना गोमांस बेचते हो. उनके सामने क्यों भीगी बिल्ली बन जाते हो?.

बेचारे सेक्युलर

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ये बेचारे सेक्युलर नहीं जानते कि सारे दुश्मनों से एक साथ पंगा नहीं लिया जाता. घर में चिराग़ जला लेने के बाद उनका भी नंबर आएगा.

हालांकि उनमें से भी कई के पास अधिक दूर तक देखने वाली 'दिव्य दृष्टि' है, जिससे अमरीका के जार्ज बुश ने इराक़ में छिपे रासायनिक हथियार देख लिए थे.

ख़ैर, हिंदुत्व की विश्व विजय के बाद इस धार्मिक ख़ूनख़राबे पर थू-थू होगी तो पल्टी मार जाएंगे- बसुधैव कुटुंबकम, कण कण में वही एक ईश्वर है.

मतिमंद सेक्युलर पूछते हैं इस पर अभी अमल करने में क्या दिक़्क़त है. वे इतना भी नहीं जानते कि क्षमा शोभती उस भुंजग को जिसके पास गरल हो.

अगर सेक्युलर इतने ही क़ाबिल होते तो क्या धर्मयोद्धाओं को इतनी सी बात समझा नहीं पाते कि जब दिव्य दृष्टि से दिखे उनके भगवान को सत्ता के लिए इस्तेमाल करके भुलाया जा चुका है तो वे किस खेत की मूली हैं?

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