सोशल मीडिया पर शेयर करने से पहले सोचें

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कहते हैं कि कई बार जो दिखता है वो सही नहीं होता. अगर सोशल मीडिया को लिया जाए तो ये बात बहुत स्पष्ट भी होती है.

गुरुवार को सोशल मीडिया, खासकर फेसबुक, पर अचानक एक तस्वीर शेयर होनी शुरु हो गई जिसमें एक पुरुष और एक महिला को बिल्कुल नग्न देखा जा सकता है. गोद में एक बच्चा भी.

इससे पहले कि पता चलता कि मामला क्या है, यूपी के दनकौर से आई इस तस्वीर को दलितों के खिलाफ अत्याचार, प्रशासन विफल जैसे टैगलाइन्स के साथ प्रचारित किया जाने लगा.

यहां तक कि इसे दादरी की घटना से भी जोड़ दिया गया और लोग टिप्पणियां करने लगे.

कुछ घंटों के बाद कुछ अखबारों में अलग रिपोर्टें आईं. लेकिन तब तक ये तस्वीरें कई लोगों तक पहुंच चुकी थी और इस पूरे मामले का वीडियो भी फेसबुक पर कई लोग देख रह थे.

कुछ लोगों ने इन तस्वीरों को ब्लर किया है लेकिन अधिकतर पोस्टों में ये फोटो साफ साफ देखी जा सकती हैं.

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शाम के समय बीबीसी हिंदी ने जब क्षेत्र के एसएसपी किरन एस से बात की तो उन्होंने बिल्कुल ही अलग बात बताई.

एसएसपी का कहना था, "ये मामला जैसे बताया जा रहा है उससे उलट है. दनकौर के सुनील गौतम का मामला है जिन्होंने थाने में रपट लिखाई है कि उनकी बाइक चोरी हो गई है और वो किसी महावीर की गिरफ्तारी चाहते हैं. पुलिस जांच चल रही है लेकिन इसी बीच सुनील गौतम और उनके परिवार की महिलाओं ने गुरुवार को सड़क पर अपने कपड़े उतार दिए.’’

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पुलिस अधिकारी ने बताया कि ये दलित परिवार ही है और उन्होंने अपने कपड़े खुद उतारे थे. अधिकारी का कहना था, "पुलिस क्यों किसी के कपड़े उतारेगी. हमने इनके खिलाफ़ केस दर्ज किया है. स्थानीय लोगों ने भी शिकायत की है इस परिवार के खिलाफ.’’

इस परिवार से अभी बात नहीं हो सकी है. सोशल मीडिया पर ये तस्वीरें अब भी घूम रही हैं. वीडियो में देखा जा सकता है कि पुलिसवाले उन्हें रोक रहे हैं.

कई लोग इसे दुखद बता रहे हैं कि 'एक शिकायत पर कार्रवाई को लेकर एक दलित परिवार को कपड़े उतारने पड़ रहे हैं' लेकिन ये भी अजीब है कि कई लोग बिना पूरी जानकारी के सोशल मीडिया पर आ रही ख़बरों को सही मान लेते हैं.

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