बंदरगाहों पर गोमांस की जांच के लिए लैब

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भारतीय बंदरगाहों पर प्रयोगशाला में इस बात की जांच की जाएगी कि निर्यात किया जा रहा मांस गाय का है या भैंस का.

यहां गोमांस का निर्यात ग़ैर-क़ानूनी है.

कृषि राज्य मंत्री संजीव कुमार बालियान ने समाचार एजेंसी एएफ़पी को बताया कि निर्यात किए जाने वाले मांस की जांच करने वाली प्रयोगशालाओं से बंदरगाहों से गोमांस के ग़ैर-क़ानूनी निर्यात पर रोक लगेगी.

बालियान ने कहा, "गोमांस के ग़ैर-क़ानूनी निर्यात को रोकने के लिए बंदरगाहों पर प्रयोगशालाएं बनाने का फ़ैसला लिया गया है."

जांच का केंद्र ख़ासतौर से पश्चिमी शहरों में होगा. भारत से किया जाने वाला ज़्यादातर निर्यात इन्हीं इलाक़ों से होता है.

दादरी हत्या

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पिछले महीने दिल्ली से सटे दादरी में गोमांस खाने की अफ़वाह पर 50 साल के मोहम्मद अख़लाक़ की भीड़ ने पीट-पीटकर हत्या कर दी थी.

भीड़ की हिंसा का शिकार उनका बेटा दानिश गंभीर रूप से घायल हो गया था.

अमरीकी कृषि विभाग की ओर से जारी किए गए रिपोर्ट के मुताबिक़ गोहत्या पर व्यापक स्तर पर पाबंदी लगे होने के बावजूद भारत दुनिया का बीफ़ निर्यात करने वाला सबसे बड़ा देश है.

भारत के अधिकांश राज्यों में गोहत्या पर पाबंदी है. यहां का बहुसंख्यक हिंदू समुदाय गाय को पवित्र पशु मानता है.

हालांकि भैंस के मांस का सेवन बड़े पैमाने पर स्वीकार्य है.

बुनियादी आहार

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गोहत्या पर पाबंदी ने बड़े पैमाने पर बहस छेड़ दी है. सवाल उठ रहे हैं कि लोग क्या खाएं और क्या नहीं, ये सरकार कैसे तय कर सकती है.

बीफ़, चिकेन और बकरे के मांस से सस्ता होने के कारण ग़रीब मुसलमानों, आदिवासियों और दलितों (पहले अछूत) का बुनियादी आहार है.

साल 2015 में ब्राज़ील के 20 लाख टन के मुक़ाबले भारत से 24 लाख टन बीफ़ निर्यात होने की संभावना जताई जा रही है.

जानकारी के मुताबिक़ भारत में तक़रीबन 1,700 बूचड़ख़ाने हैं. इनमें से अधिकांश उत्तर प्रदेश और पश्चिमी महाराष्ट्र में स्थित हैं.

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