जेपी आंदोलन से निकले बिहार के दिग्गज नेता

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राष्ट्रीय जनता दल के लालू प्रसाद यादव, जनता दल यूनाइटेड के नीतीश कुमार और भारतीय जनता पार्टी के सुशील मोदी के बीच एक बात समान है और वो ये कि इन तीनों नेताओं का करियर एक ही सियासी अखाड़े से और लगभग एक ही समय शुरू हुआ.

ये तीनों जेपी आंदोलन में विद्यार्थी नेता के रूप में उभरे और बुलंद मुक़ाम हासिल किया. सुशील मोदी अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से आए थे. आपातकाल के बाद वहीं लौट गए.

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लालू और नीतीश ने बिहार से होते हुए केंद्र की सियासत में भी अपना सिक्का जमाया. सुशील मोदी भी केंद्र में मंत्री रह चुके हैं.

राम विलास पासवान थोड़ा सीनियर हैं. वो जेपी आंदोलन में शामिल नहीं हुए लेकिन आपातकाल के विरोध में जेल जाने वालों में उनका भी नाम आता है.

एक नज़र इन नेताओं के करियर पर-

लालू प्रसाद यादव

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1970: पटना विश्वविद्यालय छात्र संघ के महासचिव.

1973 : पटना विश्वविद्यालय छात्र संघ के अध्यक्ष.

1974-77: जयप्रकाश नारायण के नेतृत्व वाले आंदोलन में शामिल. लालू इस आंदोलन के सबसे अहम युवा नेता थे.

1977: आपातकाल के बाद हुए आम चुनाव में जनता पार्टी के टिकट पर लालू छपरा से जीत कर 29 साल की उम्र में सांसद बने.

1980: लोकसभा चुनाव हारे लेकिन विधानसभा चुनाव में उनकी जीत हुई. 1985 में विधानसभा के लिए दोबारा चुने गए.

1989: कर्पूरी ठाकुर के देहांत के बाद लालू यादव विधानसभा में विपक्ष के नेता बने. उसी साल लोकसभा चुनाव में जीते.

1990: प्रधानमंत्री वीपी सिंह जनता पार्टी की ओर से बिहार में राम सुन्दर दास को मुख्यमंत्री बनाना चाहते थे और चन्द्रशेखर चाहते थे रघुनाथ झा को. उपमुख्यमंत्री देवी लाल ने लालू प्रसाद के नाम का प्रस्ताव सामने रखा. तब तक लालू बिहार में यादव और मुस्लिम समुदाय के लीडर माने जाने लगे थे. इसी साल मुख्यमंत्री की हैसियत से उन्होंने लाल कृष्ण अडवाणी की रथ यात्रा रोकी थी.

1997: चारा घोटाले के कारण उन्हें मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा. इस्तीफे के बाद पत्नी राबड़ी देवी मुख्यमंत्री बनीं. जनता पार्टी में अपने ख़िलाफ विद्रोह के ख़तरे के कारण अपनी अलग पार्टी बनाई और इस तरह 5 जुलाई 1997 को राष्ट्रीय जनता दल की स्थापना हुई.

2004: आम चुनाव में पार्टी को 21 सीटें मिलीं. लालू दो लोकसभा सीटों से जीते और यूपीए सरकार में शामिल हुए. वो रेल मंत्री बने. उनके नेतृत्व में भारतीय रेल ने भारी आर्थिक क़ामयाबी हासिल की.

2013: लालू यादव चारा घोटाला केस में दोषी पाए गए. उन्हें जेल जाना पड़ा और लोकसभा की सीट छोड़नी पड़ी.

2014: आम चुनाव में उनकी पार्टी को केवल 4 सीटें मिलीं.

2015: पुराने साथी नीतीश कुमार का दामन पकड़ा. उनसे दोस्ती, फिर दुश्मनी और एक बार फिर दोस्ती करके बीजेपी को हराने के लिए एक महागठबंधन की स्थापना की है.

नीतीश कुमार

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1974-77: लालू प्रसाद यादव से कुछ साल छोटे नीतीश कुमार का सियासी सफर भी उन्हीं की तरह जेपी आंदोलन से शुरू होता है. 1977 में लालू प्रसाद की तरह जनता पार्टी में शामिल हुए.

1985: लालू की तरह उनके सियासी करियर शुरू होने में देरी हुई, लेकिन इसी साल बिहार विधानसभा में चुनाव जीता.

1989: जनता दल के टिकट पर पहली बार लोकसभा चुनाव के मैदान में उतरे और जीत हासिल की.

1990: कुछ महीने के लिए राज्य कृषि मंत्री रहे.

1998-2000: इस 12 साल के अरसे में वो केंद्र में कृषि, रेल और ट्रांसपोर्ट मंत्री के पदों पर रहे.

2000: बिहार के मुख्यमंत्री बने लेकिन केवल आठ दिनों के लिए.

2000-2004: नीतीश कुमार एक बार फिर केंद्र में कृषि और रेल मंत्रालय में कैबिनेट मंत्री रहे. वो 2004 में आम चुनाव में छठी बार जीते और संसद में जनता दल यूनाइटेड के लीडर बने.

2005-2014: नीतीश कुमार ने बिहार के मुख्यमंत्री की हैसियत से नाम कमाया. लोगों ने कहा उनके नेतृत्व में बिहार आर्थिक रूप से आगे बढ़ा लेकिन 2014 के आम चुनाव में उनकी पार्टी की बुरी तरह हार के कारण उन्होंने पद से इस्तीफा दे दिया और जीतन राम मांझी को मुख्यमंत्री पद पर बिठा दिया. बाद में दोनों नेताओं में ठनी. मांझी पार्टी से निकाले गए.

2015: फ़रवरी में एक बार फिर से वो बिहार के मुख्यमंत्री बने. अब उन्होंने लालू प्रसाद से बीजेपी के खिलाफ हाथ मिलाया है.

सुशील मोदी

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1973: बीजेपी नेता सुशील मोदी भी जेपी आंदोलन की पैदावार हैं. जब लालू पटना विश्वविद्यालय के अध्यक्ष बने उस समय सुशील मोदी इसके महासचिव बनाए गए थे. आपातकाल के दौरान वो 19 महीने जेल में रहे.

1983-86: सुशील मोदी अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद में कई पदों पर रहने के बाद 1983 में इसके महासचिव बनाए गए.

1990: बिहार विधानसभा का चुनाव लड़े और जीते.

1996-2004: इस पूरे अरसे में वो बिहार विधानसभा में विपक्ष के नेता बने रहे.

2004: भागलपुर से लोकसभा का चुनाव जीते.

2005: बिहार में एनडीए सत्ता में आई और सुशील उप मुख्यमंत्री बने. इससे पहले उन्हें लोकसभा सीट से इस्तीफा देना पड़ा. बिहार में 2010 के विधानसभा में एनडीए की दोबारा जीत के बाद भी वो उपमुख्यमंत्री के पद पर बने रहे. अब 2015 के चुनाव में वो एनडीए में बीजेपी के सबसे बड़े नेता हैं. कुछ विशेषज्ञों का कहना है अगर एनडीए की जीत हुई तो सुशील कुमार मोदी बिहार के अगले मुख्यमंत्री बन सकते हैं.

शरद यादव

1974: पहली बार मध्य प्रदेश में जबलपुर से चुनाव जीत कर सांसद बने. जेपी आंदोलन अपने शबाब पर था. खुद जयप्रकाश नारायण ने उन्हें इसमें शामिल होने का न्योता दिया. वो इस आंदोलन में शामिल युवा नेताओं में सबसे प्रसिद्ध थे.

1977: जेपी के प्रोत्साहन पर वो 1977 में लोकसभा का चुनाव फिर लड़े और विजयी रहे.

1978: लोक दल के महासचिव बने.

1989-90: प्रधानमंत्री वीपी सिंह की कैबिनेट में पहली बार केंद्रीय मंत्री बने. उन्हें वस्त्र और खाद्य प्रसंस्करण मंत्री बनाया गया.

1997: जनता दल के अध्यक्ष बनाए गए.

1999-2002 : एक बार फिर वो मंत्री बने और इस बार नागरिक उड्डयन विभाग मिला. इसके बाद श्रम मंत्री बने.

2015: शरद यादव जनता दल यूनाइटेड की स्थापना (2003) के समय से इसके अध्यक्ष हैं. वो सात बार लोकसभा के लिए चुने गए हैं जबकि दो बार राज्यसभा के लिए. वे लालू-नीतीश के महागठबंधन के एक तरह से सरपरस्त हैं.

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