सौ रंगों से सजी उस्ताद साबरी की सारंगी

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सारंगी नवाज़ उस्ताद कमाल साबरी का जन्म संगीत को समर्पित परिवार में हुआ. वे सारंगी वादन की सातवीं पीढ़ी से आते हैं.

उनकी संगीत की शिक्षा सेनिया और मुरादाबाद घरानों की उत्तर भारतीय शैली में हुई.

पाँच वर्ष की उम्र में उन्होंने अपने पिता और गुरु उस्ताद साबरी खान से सारंगी की शिक्षा लेनी शुरू की.

पदमश्री उस्ताद साबरी खान प्रख्यात सारंगी वादक हैं.

उस्ताद कमाल साबरी ने आज के दौर के संगीत के साथ भी कई नए प्रयोग किए हैं.

उन्होंने तिहाड़ जेल के कैदियों को एक साल संगीत सिखाया और फिर उनके साथ एक एल्बम 'सारंगी रिडिफाइन' नाम से बनाई जो काफी प्रसिद्ध हुई.

इसका प्राचीन नाम 'सारिंदा' है जो बाद में सारंगी हुआ. सारंगी मुख्य रूप से गायकी प्रधान वाद्य यंत्र है. इस यंत्र में 35 तक तार होते हैं.

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Image caption वर्ष 2006 में उस्ताद कमाल साबरी का पहला एल्बम 'डांस ऑफ़ द डेज़र्ट' ग्रैमी अवार्ड के लिए नामांकित हुआ. वो देश-विदेश में कई एकल प्रस्तुतियां दे चुके हैं. तस्वीर में कमाल साहब अपने बेटे के साथ नज़र आ रहे हैं.
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Image caption सारंगी मुख्यतः उत्तर भारतीय संगीत शैली का वाद्य यंत्र है. सारंगी शब्द हिंदी के 'सौ' और 'रंग' से मिलकर बना है जिसका मतलब है सौ रंगों वाली. सारंगी को पिनाकिनी या पिनाकी वीणा भी कहा जाता था.
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Image caption कमाल साबरी का कहना है की सारंगी ऐसा वाद्य है, जो हर तरह के संगीत के साथ बजाया जा सकता है.
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Image caption कमाल साहब कहते हैं कि एक सारंगी वादक हर घराने के संगीतकार के साथ बजा सकता है. पर यह बात और वाद्य यंत्रों पर लागू नहीं होती.
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Image caption सारंगी वादक को साज़ के साथ सुर की बारीकियों का ज्ञान होना भी जरूरी है. सारंगी एक विशेष प्रकार के 'तुन' के पेड़ की लकड़ी से बनाई जाती है जिसे ख़ास कारीगर ही बना सकते हैं.
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Image caption कमाल साबरी सारंगी की परंपरा को आगे ले जा रहे हैं और चाहते हैं उनके खानदान की नयी पीढ़ी इस सफर को बरक़रार रखे.
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Image caption कमाल साबरी हिंदुस्तानी शागिर्दों को तालीम देने के साथ ही विदेशों में भी सारंगी सिखाते हैं, ताकि यह साज़ दुनिया भर में अपनी पहचान कायम करे.
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Image caption ऐसा माना जाता है कि सारंगी ही एकमात्र ऐसा वाद्य है जो मानव कंठ के सबसे नजदीक है.
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Image caption कमाल साबरी कहते हैं कि परंपरा को बिना बदले नए प्रयोग करके ही किसी भी साज़ को नयी पहचान दी जानी चाहिए.

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