पासवान-मांझी में कौन है बड़ा दलित नेता?

पासवान और मांझी

जीतन राम मांझी यही समझते हैं कि वह राम विलास पासवान से बड़े दलित नेता हैं. लेकिन दूसरी ओर पासवान भी यही मानते हैं कि वह बिहार के सबसे बड़े दलित नेता हैं.

बिहार में कुल मतदाताओं में 16 फ़ीसदी मतदाता दलित हैं. यही वजह है कि हर गठबंधन इन दोनों नेताओं को अपने ख़ेमे में लाना चाहता था.

पहली कड़ीः क्या लालू केवल यादवों के नेता हैं?

वैसे पासवान और मांझी इस चुनाव में बीजेपी के साथ शामिल हैं. लेकिन मतदाता इन दोनों में किन्हें बड़ा दलित नेता मानते हैं?

सर्वेक्षण

पिछले चुनाव सर्वेक्षणों में ये ज़ाहिर हुआ है कि पासवान बिहार में सबसे लोकप्रिय दलित नेता रहे हैं, हालांकि वह सभी दलित जातियों में लोकप्रिय नहीं हैं.

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लेकिन वह अपनी जाति (पासवान के वोट) को अपने गठबंधन के पक्ष में मोड़ सकते हैं.

दूसरी कड़ीः क्या बिहार में कांग्रेस उजड़ चुकी है?

पासवान की एलजेपी ने 2004 और 2009 का लोकसभा एवं 2010 का विधानसभा चुनाव राजद के साथ गठबंधन में लड़ा था.

इन चुनावों में राजद और उसकी सहयोगी पार्टियों को क्रमश: 42, 31 और 29 फ़ीसदी दलित वोट मिले थे.

तीसरी कड़ीः नीतीश 'लोकप्रिय', पर जुटा सकेंगे वोट?

राजद गठबंधन को दलितों के वोट कम मिलने की वजह ये थी कि मांझी पहले जेडीयू के साथ थे और उनके चलते ग़ैर-पासवान दलित वोट (जिन्हें महादलित कहा जा रहा है) जेडीयू और बीजेपी के समर्थन में था.

गठबंधन

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2010 के विधानसभा चुनाव के दौरान पासवान का राजद से गठबंधन था.

चौथी कड़ीः क्या बिहार चुनाव केवल अपराधियों के लिए है?

तब 55 फ़ीसदी पासवानों ने राजद और सहयोगियों को मत दिया था जबकि 21 फ़ीसदी ने एनडीए गठबंधन को.

महादलितों में केवल 16 फ़ीसदी मतदाताओं ने राजद को वोट दिया था जबकि 35 फ़ीसदी महादलित वोट एनडीए को मिले थे.

वैसे पासवान और मांझी में बिहार में बड़ा दलित नेता कौन है, इसका जवाब इस चुनाव में मिल जाएगा.

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