बच्चे गोद नहीं देगी मदर टेरेसा की संस्था

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मदर टेरेसा की संस्था 'मिशनरीज़ ऑफ़ चैरिटी' ने कहा है कि वो अब ज़रूरतमंद बच्चों को गोद देने का काम नहीं करेगी.

संस्था ने अनाथ बच्चों को अपनाने के बारे में केंद्र सरकार के नए दिशा निर्देशों के बाद ये क़दम उठाने का फ़ैसला किया है.

मिशनरीज़ ऑफ़ चैरिटी का कहना है कि ये फ़ैसला उसने दो महीने पहले ले लिया था, लेकिन जारी अब किया गया है.

नोबेल पुरस्कार विजेता और कैथोलिक नन मदर टेरेसा कहती थी, “मैं बच्चे गोद देकर गर्भपात से लड़ती हूं.”

लेकिन उनकी बनाई संस्था मिशनरीज़ ऑफ चैरिटी का कहना है कि केंद्र सरकार के नए दिशानिर्देशों को देखने के बाद वो ख़ुद को इससे अलग कर रही है.

बाधाएं

दिल्ली में कार्यरत संस्था की एक नन ने बताया कि समस्या ये है कि अब नए निर्देशों के अनुसार बिन ब्याहे या तलाकशुदा लोग भी बच्चे गोद ले सकते हैं जबकि मिशनरीज़ का मानना है कि बच्चे को मां और पिता दोनों की ज़रूरत होती है.

मिशनरीज़ इस बात से भी ख़ुश नहीं है कि गोद लेने वाले माता पिता बहुत सारे बच्चों में अपने लिए बच्चा ‘चुन सकते हैं’.

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मिशनरीज़ ऑफ़ चैरिटी अब भी भारत और उससे बाहर भी कई अनाथालय चलाती है.

उनका कहना है कि वो बिन ब्याही मांओं और उनके बच्चों की देखभाल करते रहेंगे.

सरकार का कहना है कि उन्हें उम्मीद है कि नन अपने फ़ैसले पर दोबारा विचार करेंगी लेकिन उन्हें दिशानिर्देशों को तो मानना होगा.

भारत में लगभग दो करोड़ अनाथ बच्चे हैं जिनमें गोद लिए जाने वाले बच्चों की संख्या बहुत कम है.

पिछले साल कुछ हज़ार बच्चों को ही गोद लिया गया. इतनी कम संख्या में बच्चों के गोद लिए जाने की एक वजह अफ़सरशाही की बाधाएं हैं.

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