अशिक्षित वोटरों के मुद्दे शिक्षितों से अलग होते हैं?

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बिहार चुनावों पर बीबीसी की विशेष सिरीज़ 'बूझिए ना बिहार को' में हम आपको अगले कुछ दिनों तक राज्य से जुड़े मिथकों और तथ्यों के बारे में बताते रहेंगे.

इस कड़ी में जानिए, क्या बिहार में होने वाले चुनावों में अमीर और ग़रीब वोटरों के मुद्दे अलग-अलग होते हैं?

वोट देते समय अमीर वोटरों के मुक़ाबले ग़रीब और अशिक्षित वोटरों के ज़हन में कौन से मुद्दे अहम होते हैं?

सामान्य धारणा ये है कि अशिक्षित और ग़रीब मतदाता राजनीति को नहीं समझते. वे वोट देते वक़्त सही फ़ैसले नहीं ले पाते.

वहीं दूसरी ओर पढ़े लिखे और संपन्न लोग राजनीति को समझते हैं. वे मुद्दों के लिए वोट देते हैं और अपना वोट देने के लिए सही फ़ैसले करते हैं.

वास्तविकता क्या है?

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मुद्दों के लिहाज़ से देखें तो बिहार में शिक्षित और अशिक्षित मतदाताओं के बीच में कोई फ़र्क़ नहीं है.

2010 के विधानसभा चुनाव के दौरान 51 फ़ीसदी शिक्षित मतदाताओं ने सुशासन के नाम पर वोट दिया था.

अशिक्षित लोगों में 49 फ़ीसदी मतदाताओं ने भी इसी मुद्दे पर अपना मत डाला था.

इसी तरह से 54 फ़ीसदी अमीर और मध्य वर्ग के लोगों ने कहा था कि उन्होंने सुशासन के लिए वोट किया है.

ग़रीब और निचले तबक़े के 49 फ़ीसदी लोगों ने कहा कि वोट देते वक़्त उनकी प्राथमिकता में सुशासन का मुद्दा ही था.

ऐसे में ये ये मानना कि ग़रीब और अशिक्षित लोग मुद्दों पर वोट नहीं डालते, ग़लत है.

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छठी कड़ी: बिहार चुनाव में 'भोटकटवा' बहुत हैं क्या?

सातवीं कड़ी: क्या बिहार में वोट सिर्फ़ जाति पर पड़ते हैं?

आठवीं कड़ीः क्या सवर्ण जाति देख कर वोट नहीं देते?

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