दादरी और ग़ुलाम अली जैसी घटनाएं दुखद: मोदी

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उत्तर प्रदेश के दादरी में गोमांस खाने की अफ़वाह पर हुई अख़लाक़ की हत्या और मुंबई में पाकिस्तानी गायक ग़ुलाम अली के कार्यक्रम रद्द हो जाने को दुखद बताया है.

बांग्ला भाषा के समाचार पत्र ' आनंद बाज़ार पत्रिका' को दिए एक साक्षात्कार में प्रधानमंत्री ने इन पर दुख ज़रूर जताया लेकिन अपनी सरकार का बचाव करते हुए उन्होंने कहा कि इन घटनाओं में केंद्र सरकार का कोई हाथ नहीं है.

पिछले महीने दादरी में 50 साल के अख़लाक़ को सैकड़ों की भीड़ ने घर में घुसकर मार डाला था. भीड़ ने अख़लाक़ के 22 वर्षीय बेटे दानिश को भी अधमरा कर दिया था.

दानिश इस समय अस्पताल में ज़िंदगी और मौत की जंग लड़ रहे हैं.

मोदी की चुप्पी

इस घटना के बाद प्रधानमंत्री ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी थी.

उनकी चुप्पी को विपक्ष ने मुद्दा बनाया है. सोशल मीडिया पर भी लोग प्रधानमंत्री की आलोचना कर रहे हैं.

पहली बार सीधे तौर पर दादरी और ग़ुलाम अली का ज़िक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि इस तरह की घटनाएं पहली बार नहीं हुई हैं.

मोदी ने कहा कि इस तरह की घटनाओं का समाधान बातचीत से ही संभव है.

विपक्षी पार्टियों पर प्रहार करते हुए मोदी ने कहा कि छद्म धर्मनिरपेक्ष लोग इसे मुद्दा बना रहे हैं. उन्होंने कहा कि भाजपा ने हमेशा छद्म धर्मनिरपेक्षता का विरोध किया है.

पिछले हफ़्ते जाने माने पाकिस्तानी ग़ज़ल गायक ग़ुलाम अली भारतीय गायक जगजीत सिंह की याद में आयोजित एक कार्यक्रम में आने वाले थे. लेकिन शिवसेना के विरोध के बाद कार्यक्रम को रद्द करना पड़ा था.

प्रणव मुखर्जी

हालांकि इससे पहले मोदी ने पिछले हफ़्ते बिहार में चुनाव प्रचार के दौरान दादरी घटना का नाम लिए बग़ैर कहा था कि लोगों को राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी की बातों पर ध्यान देना चाहिए.

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नवादा में आयोजित रैली में मोदी ने कहा था, "आप राजनेताओं की बात मत सुनिए, ख़ुद नरेंद्र मोदी कहता है तो उसकी बात भी मत सुनिए. सुनना है तो देश के राष्ट्रपति ने कल (बुधवार को) जो बात कही है उसे सुनिए."

राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने पिछले बुधवार को नई दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम में कहा था, ''हम अपनी सभ्यता के आधारभूत मूल्यों को खोने नहीं दे सकते... हमारे आधारभूत मूल्य हैं कि हमने हमेशा विविधता को स्वीकार किया है, सहनशीलता और अखंडता की वकालत की है.''

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