यूपी सरकार के करोड़ों चुग रहे 'तोता मैना'

बनारस, ट्रक पर तोता-मैना का स्टिकर इमेज कॉपीरइट Roshan Jaiswal

बनारस के पुलिस अधीक्षक (ट्रैफ़िक) एसपी तिवारी कहते हैं कि शहर की सड़कों पर 'तोता-मैना' हर महीने उत्तर प्रदेश सरकार के पांच करोड़ रुपए चुग जाते हैं.

उनका इशारा 'तोता-मैना' पक्षी की तरफ़ नहीं, बल्कि उनकी तस्वीर वाला टोकन या स्टिकर हैं जिसे आरटीओ और ट्रैफ़िक पुलिस के कुछ लोगों की मिलीभगत से तैयार कर अवैध वसूली की जा रही है.

वाराणसी में प्रवेश करने वाले ट्रकों पर ये स्टिकर लगे हुए होते हैं. या ये ड्राइवरों की जेबों में पड़े होते हैं जिसका इस्तेमाल वो ट्रकों को पास कराने के लिए करते हैं.

'बड़ा रैकेट'

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ट्रक ड्राइवर धन्नू लाल यादव ने बताया कि शहर में एंट्री करने वाले तमाम रास्तों पर बने ढाबों और धर्म कांटों पर एजेंट के ज़रिए ये 'तोता-मैना' वाले टोकन मिलते हैं. लेकिन ये बहुत ही ख़ुफ़िया तौर पर बेचे जाते हैं.

अलग-अलग ट्रकों और उनके क्षेत्र के हिसाब से ये टोकन बचे जाते हैं.

एसपी तिवारी के अनुसार 10 चक्के वाले ट्रक के लिए 3,500 रुपए, 6 चक्के वाले ट्रक के लिए दो से ढाई हज़ार रुपए, 18 चक्के वाले ट्रॉलर के लिए 5,000 रुपए और छोटे पिकअप वाहन के लिए 1,500 रुपए तय हैं.

इन टोकनों की वैधता एक माह के लिए होती है. टोकन की ख़रीद-फ़रोख्त आरटीओ, ट्रैफ़िक पुलिस और एजेंट की तिकड़ी की मिलीभगत से होती है.

एक शहर के लिए एक टोकन मिलता है अगर ट्रक के आवागमन का दायरा बढ़ाना है तो रेट उसी हिसाब से बढ़ जाता है.

सरकार को चपत

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एक बार टोकन मिल जाने के बाद ट्रक में ओवरलोडिंग है या क्या भरा है, यह कोई जांचने नहीं जाता.

एसपी ट्रैफ़िक तिवारी ने बीबीसी को बताया कि 'तोता-मैना' टोकन के पीछे योजनाबद्ध तरीके से एक बड़ा रैकेट काम कर रहा है, जिसमें वाराणसी आरटीओ और ट्रैफ़िक पुलिस के लोग भी शामिल हैं.

उन्होंने बताया कि इस अवैध धंधे के चलते प्रतिमाह लगभग 5 करोड़ रुपए के राजस्व का नुक़सान सरकार को उठाना पड़ रहा है.

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