ख़याल गायकी की नई पहचान मीता पंडित

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युवा शास्त्रीय संगीत गायिका मीता पंडित अपनी अलग आवाज़ के लिए पहचानी जाती हैं.

ग्वालियर घराने की ख़याल गायकी से ताल्लुक़ रखने वाली मीता अपने परिवार की छठी पीढ़ी से आती हैं. साथ ही वो पंडित ख़ानदान की पहली महिला ख़याल गायिका भी हैं.

उनके परदादा शंकर पंडित ग्वालियर घराने के संस्थापक हदू ख़ां-हस्सू ख़ां के शिष्य और अपने समय के अग्रणी गायक थे.

दादा कृष्णराव पंडित बीसवीं सदी के दिग्गज गायकों में से थे और उनके पिता लक्ष्मण पंडित भी ग्वालियर घराने के सुप्रसिद्ध शास्त्रीय संगीतज्ञ हैं.

दिल्ली के लेडी श्री राम कॉलेज से बीकॉम करने के बाद मीता ने संगीत में एमए और फिर पीएचडी किया.

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Image caption ग्वालियर घराने की ख़याल गायिका मीता पंडित ने देश-विदेश कई प्रस्तुतियां दी हैं.
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Image caption ख़याल गायकी भारतीय शास्त्रीय संगीत का ही एक रूप है. विलम्बित व द्रुत ख़याल के दो प्रकार हैं. प्राचीन काल में 'प्रबंध' और 'रूपक' दो प्रकार की गायन' शैलियां प्रचलित थीं. रूपक शैली से ख़याल का उद्भव माना जाता है.
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Image caption मीता आज भी अपने पिता लक्ष्मण पंडित के साथ रियाज़ करती हैं. मीता ने 'वर्ल्ड स्पेस रेडियो' के गंधर्व रेडियो पर 'स्वर श्रृंगार' नाम से एक संगीत कार्यक्रम प्रस्तुत किया.
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Image caption पुराने समय में ख़याल के विषय अक्सर राज्य स्तुति, नायिका वर्णन और श्रृंगार रस आदि होते थे, बाद में इसमें नए प्रयोग भी किए जाने लगे.
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Image caption मीता ने अपनी पहली सार्वजनिक प्रस्तुति 1985 में भोपाल के भारत भवन में अपने दोनों भाइयों के साथ दी. तब मीता 9 वर्ष की थीं.
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Image caption अब तक मीता को 'द गोल्डन वॉइस ऑफ़ इंडिया', 'सुर मणि', 'युवा ओजस्विनी', 'युवा रत्न' और 'उस्ताद बिस्मिलाह खां अवॉर्ड' जैसे कई पुरस्कारों से सम्मानित किया जा चुका है.
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Image caption ख़याल गायन के साथ विविध तालों में तबला, तानपूरा और सूर मंडल का प्रयोग संगत के रूप में किया जाता है.
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Image caption प्रसार भारती ने 2005 में मीता पर ' मीता - लिंकिंग ए ट्रेडिशन विद टुडे' नाम से एक फ़िल्म भी बनाई है.

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