हमलों से निपटने का अनोखा ‘डॉक्टरी इलाज’

थिंकस्टॉक इमेज इमेज कॉपीरइट THINKSTOCK

अस्पतालों में इलाज के दौरान किसी मरीज़ की मौत हो जाने के बाद कई बार डॉक्टरों के साथ मारपीट की घटनाएँ हो जाती हैं. इससे निपटने के लिए इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) की पुणे शाखा ने 'अनोखा इलाज' ढूँढा है.

आईएमए ने निजी डॉक्टरों पर होने वाले ऐसे हमलों से निपटने के लिए 'रश टीमें' बनाई हैं, जो पुलिस के साथ मिलकर डॉक्टरों को संरक्षण देती हैं.

इन टीमों ने पिछले एक महीने में ऐसी कई घटनाओं को रोकने में अहम भूमिका निभाई है.

पुलिस से सहयोग

इमेज कॉपीरइट Devidas Deshpande

आईएमए की पुणे शाखा के अध्यक्ष डॉक्टर अविनाश भुतकर कहते हैं, "कई बार मरीज़ की मृत्यु से नाराज़ उसके रिश्तेदार और उनके साथ आए दूसरे लोग डॉक्टरों के साथ मारपीट और अस्पताल में तोड़फोड़ करते हैं. क्योंकि भीड़ 40-50 लोगों की होती है, लिहाज़ा कुछ डॉक्टरों और उनके स्टाफ़ के लिए भीड़ से निपटना मुश्किल होता है."

भुतकर कहते हैं, "ऐसी स्थितियों से निपटने के लिए ही ये टीमें बनाई गई हैं. पुलिस से भी सकारात्मक सहयोग मिल रहा है."

डॉक्टरों की ये टीमें पुलिस थानों के अधिकार क्षेत्र के अनुसार बनाई गई हैं. हर टीम के प्रमुख ने अपनी टीम का व्हॉट्स एप ग्रुप बनाया है.

कई घटनाएँ टलीं

ये टीमें अपने-अपने इलाक़े के पुलिस अधिकारियों से संपर्क बढ़ाती हैं. पुलिस अधिकारी और डॉक्टरों ने फ़ोन नंबरों का आदान-प्रदान किया है ताकि आपात स्थिति में पुलिसकर्मी आसानी से अस्पताल पहुंच सकें.

डॉक्टर भुतकर ने बताया, "एक महीने पहले सांगवी (पुणे का एक उपनगर) में एक बालक की मृत्यु के बाद डॉक्टरों को कुछ लोगों ने मोबाइल पर धमकी दी. लेकिन उन लोगों के अस्पताल में आने से पहले ही आईएमए के 30-40 सदस्य अस्पताल में पहुंच गए, जिससे घटना टल गई. एक महीने में इस तरह की कम से कम चार घटनाएं टाली गई हैं."

मारपीट और हड़ताल

इमेज कॉपीरइट Other

ग़ौरतलब है कि पुणे में बुधवार रात को ही एक पुलिसकर्मी ने सरकारी अस्पताल के एक डॉक्टर कर्मा भूटिया से मारपीट की थी.

ससून अस्पताल में हुई इस घटना के बाद सभी रेजिडेंट डॉक्टर हड़ताल पर चले गए थे. बाद में इस पुलिसकर्मी की गिरफ़्तारी के बाद डॉक्टरों ने अपनी हड़ताल ख़त्म की.

इस घटना के बाद अस्पतालों में डॉक्टरों की सुरक्षा को लेकर फिर से चर्चा शुरू हो गई है.

पिछले दस महीनों में राज्य में डॉक्टरों पर हुआ यह तेरहवां हमला था.

आईएमए की राज्यस्तरीय बैठक में पुणे शाखा के पदाधिकारियों ने इस नई कोशिश की जानकारी दी.

डॉक्टर भुतकर का मानना है कि व्हॉट्स अप जैसे साधनों के कारण डॉक्टर एक-दूसरे से आसानी से संपर्क कर सकते हैं और दूसरे स्थानों पर ऐसी टीमें चलाई जा सकती हैं.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए यहां क्लिक करें. फ़ेसबुक और ट्विटर पर भी फ़ॉलो कर सकते हैं.)

संबंधित समाचार