'हाजी अली में महिलाओं का जाना पाप होगा'

मुंबई स्थित हाजी अली दरगाह. इमेज कॉपीरइट AP

हाजी अली दरगाह में औरतों के मज़ार तक प्रवेश के मामले पर दरगाह ट्रस्ट ने हलफ़नामा देकर कहा है वहां महिलाओं को प्रवेश देना घिनौना पाप होगा.

साल 2012 तक मुंबई के हाजी अली में औरतों के भीतर तक जाने पर मनाही नहीं थी लेकिन फिर ट्रस्ट ने उसपर पाबंदी लगा दी.

महिला अधिकारों के लिए काम करने वाले एक संगठन - भारतीय मुस्लिम महिला आंदोलन ने साल 2014 में मुंबई हाई कोर्ट में याचिका दायर कर ये मांग की थी कि महिलाओं को भीतर तक प्रवेश दिया जाए.

पिछली सुनवाई में अदालत ने सुझाव दिया था कि ट्रस्ट महिलाओं को मज़ार तक जाने की इजाज़त देने के मामले में मिल जुलकर फ़ैसला करे.

दरगाह ट्रस्ट के वकील शोएब मेमन ने अदालत में प्रस्ताव पेशकर कहा कि, ''संविधान की धारा 26 के मुताबिक़ ट्रस्ट को अपने धार्मिक कार्य करने का मूलभूत अधिकार प्राप्त है. इसमें और कोई बाहरी व्यक्ति या संस्था दख़लंदाजी नहीं कर सकती है.''

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ट्रस्ट ने महिलाओं की पूजा अर्चना और नमाज़ के लिए एक सुरक्षित जगह मुहैया कराई है. जिसमें इस बात का ध्यान रखा गया है कि महिलाएं मुख्य मज़ार के क़रीब तक जा सकें.

वकील का दावा था कि मज़ार पर भीड़ को देखते हुए महिला भक्तों ने इस व्यवस्था का स्वागत किया था.

वहीं भारतीय मुस्लिम महिला आंदोलन के वकील राजू मोरे का कहना था कि पवित्र स्थल पर नमाज़ अदा करना इबादत का अहम हिस्सा है.

इस मामले की अंतिम सुनवाई 17 नवंबर को होगी.

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