'गीता' आए तो शायद पुल बिजली भी आ जाए

पाकिस्तान में गीता
Image caption भटक कर पाकिस्तान पहुंची गीता को कई लोग बता चुके हैं अपना.

बिहार के सहरसा जिले के कबीरा धाप के लोगों को पकिस्तान में मिली भारत की लड़की गीता का बेसब्री से इंतज़ार है.

उन्हें लगता है कि गीता के आने से उन्हें दशकों से हो रही मुश्किलों से निजात भी मिल जाएगी.

बाक़ी की दुनिया से कटे हुए कोसी नदी के बीच बसे इस टापू तक पहुंचे का एकमात्र सहारा है नाव.

नदी पार करने के बाद भी दो किलोमीटर का पैदल सफ़र. न बिजली, ना दूसरे संसाधन. मोबाइल का सिग्नल भी बहुत टूट टूट कर मिलता है.

बिजली नहीं है तो टेलीविज़न भी नहीं है और ख़बरों का एकमात्र ज़रिया रेडियो है. इस इलाक़े का यह हाल आजादी के पहले से ही है.

गीता के बहाने ही सही, कबीरा धाप में मीडिया वालों और अधिकारियों का आना जाना लगा हुआ है. पहली बार मीडिया और अधिकारी इस गाँव की बदहाली से रूबरू हो रहे हैं.

हालांकि गीता की वापसी का सारा दारोमदार बिहार के डीएनए पर आ टिका है क्योंकि तीन और प्रदेशों से पकिस्तान में मिली गीता पर दावेदारी की जा रही है.

इसमें उत्तर प्रदेश और झारखंड के भी परिवार हैं जिन्होंने गीता को अपनी बेटी बताया है.

सबसे पुख्ता दावेदारी कबीरा धाप गाँव के जनार्दन महतो की है जिनकी तस्वीर गीता ने भी पकिस्तान में पहचान ली है.

उसी आधार पर अब यहाँ के लोगों को भरोसा हो गया है कि पकिस्तान में मिलने वाली गीता दरअसल उनकी अपनी हीरामणि उर्फ़ हीरा ही है.

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हलाकि पकिस्तान से आ रही ख़बरों के हिसाब से, गीता का कहना है कि उसकी शादी नहीं हुई है. मगर जिस गीता के हीरा होने का दावा किया जा रहा है वो शादीशुदा है और उसके पति और बेटा पंजाब के लुधियाना में रह रहे हैं.

उधर भारत की विदेश मंत्री ने स्पष्ट किया है कि डीएनए टेस्ट के बाद ही गीता को उसके परिवार वालों को सुपुर्द किया जाएगा. जनार्दन महतो को विदेश मंत्रालय की पहल पर दिल्ली ले जाया गया है और वहीं पर उनका डीएनए टेस्ट भी होगा.

गाँव में हीरा के रिश्तेदारों का दावा है कि वो उनकी है. वो पकिस्तान से प्रसारित तस्वीरों को देख कर ऐसा कह रहे हैं और ख़ुशी के मारे फूले नहीं समा रहे हैं.

कबीरा धाप में दसहरे के लिए मेला लगा हुआ है जिसमे माइक से बहुत जोर जोर से आवाज़ आ रही है. ऐसा लग रहा है कि कोई टीवी चैनल का प्रसारण है.

मगर पकिस्तान के एक टीवी चैनल की रिकार्डिंग को कबीरा धाप गाँव के मेले में एक माइक के ज़रिये बजाया जा रहा है.

Image caption गीता को अपनी बेटी बताने वाले जनार्दन महतो के भाई राजदेव.

गाँव के लिए यही आवाज़ बड़े आकर्षण का केंद्र है. 11 साल पहले पंजाब के एक मेले में गुम हुई कबीरा धाप की हीरामणि भटकते हुए कैसे सरहद के उस पार पहुँच गईं, यह अभीतक पता नहीं चल पाया है.

मगर गाँव के लोग टीवी पर उसकी तस्वीर देखकर आश्वस्त हैं की वो उनकी हीरा ही है.

जनार्दन महतो के भाई राजदेव कहते हैं कि कुछ लोगों ने टीवी पर जब इस ख़बर को देखा तो उन्होंने अपने मोबाइल में रिकार्डिंग की और उसे लाकर जनार्दन महतो को दिखाया.

वो कहते हैं, "हमने गोद में खिलाया है. अपनी बच्ची को हम कैसे नहीं पहचानेंगे? वो शादी होने तक यहीं पर रही थी. वही कद काठी. वही नाक नक्शा. सबकुछ वही है. वही हमारी बच्ची है."

चरों तरफ से कोसी नदी से घिरे इस टापू में लोगों को अब हीरा की वापसी का इंतज़ार है. हीरा उर्फ़ गीता से जुड़ी हर ख़बर गाँव के लोगों की उत्सुकता बढ़ाती है क्योंकि यह बिलकुल सुदूर इलाका है जहाँ नदी पार कर आने वाले ही ख़बर लाते हैं.

Image caption जनार्दन महतो का घर.

अपने पिता जनार्दन महतो को पटना तक छोड़कर वापस गाँव लौटे 'गीता' के बड़े भाई बलराम गांववालों को अपने सफ़र के बारे में बता रहे हैं.

बीबीसी से जब उनकी मुलाक़ात हुई तो बलराम का कहना था कि इस बार गाँव में दिवाली बड़े धूम धाम से मनाई जाएगी.

कबीर धाप में रहने वाले हीरा के रिश्तेदार भी कहते हैं कि जब खबर आई कि वो लुधियाना में खो गई तो सबने मिलकर उसे खूब ढूंढा. उसे ढूँढने में जनार्दन महतो ने लुधियाना में पांच सालों तक मजदूरी भी की.

अब मामला डीएनए टेस्ट पर निर्भर करता कि पकिस्तान में मिलने वाली गीता कबीरा धाप की हीरा ही है या नहीं.

बलराम को भरोसा है कि डीएनए टेस्ट के बाद वो ज़रूर गाँव वापस आ जाएगी.

डीएनए टेस्ट के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने तपाक से जवाब दिया, "कोई जितना भी दावा करे. चाहे वो झारखंड के लोग हों या फिर उत्तर प्रदेश के. हमारी बेटी है. हमारा खून है. खून तो मिलेगा ही. बिहार का डीएनए भारत की बेटी का भविष्य तय करेगा."

फिलहाल तो गाँव के लोगों के लिए कोई संगीत इतना मधुर नहीं है जितना की टीवी चैनलों पर गीता की कहानी. इसलिए गाँव के मेले में टीवी चैनलों की रिकॉर्डिंग दिनभर बज रही है.

हालांकि जैसा बलराम ने कहा, तमाम प्रदेशों से हुए दावों के बीच बिहार का डीएनए भारत की बेटी का भविष्य तय करेगा.

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