पहले एक बच्चे, अब मृतक के पिता पर केस

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उत्तर प्रदेश के फतेहगढ़ में पुलिस ने नियमों के ख़िलाफ़ एक छह साल के बच्चे पर हत्या का मुक़दमा दर्ज किया फिर उसी मामले में अब उसने मृत बच्चे के पिता पर मामला दर्ज करने की तैयारी कर रही है.

ज़िला पुलिस ने छह साल के एक बच्चे पर लगभग उसी उम्र के दूसरे बच्चे की ग़ैर इरादतन ह्त्या का मुक़दमा दर्ज किया.

मुक़दमा मृतक के पिता की शिकायत पर दर्ज किया गया है. चूंकि परिवार दलित समुदाय से था तो मामले में एससी-एसटी एक्ट की धाराएं भी लगाई गई.

लेकिन पोस्टमार्टम रिपोर्ट में बच्चे की मौत का कारण जब बीमारी बताई गई है तो नाराज़ पुलिस बच्चे के पिता पर झूठा मुक़दमा लिखाने की कार्रवाई की तैयारी कर रही है.

मोहम्मदाबाद पुलिस थाने के थानाध्यक्ष भीम सिंह ने बताया कि सोमवार को महेश जाटव के बेटे मौत हो गई थी.

उन्होंने बताया, ''महेश ने अपने बेटे के उम्र के ही एक बच्चे के खिलाफ ही आईपीसी की धारा 304 के तहत ग़ैर इरादतन हत्या का मुकदमा दर्ज कराया.''

पुलिस के मुताबिक महेश जाटव का बेटा और जिस बच्चे पर ग़ैर इरादतन का हत्या का आरोप लगा है, दोनों गांव के एक ही स्कूल में पहली कक्षा में पढ़ते थे.

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मृतक के पिता के मुताबिक़ दोनों बच्चों की स्कूल में लड़ाई हुई थी. इसमें उनके बेटे को गंभीर अंदरूनी चोट आईं, जिसकी वजह से उसकी मौत हो गई.

लेकिन पोस्टमोर्टम रिपोर्ट में बच्चे की मौत का कारण बीमारी बताया गया है. इसके बाद पुलिस अब महेश जाटव के खिलाफ कार्रवाई की तैयारी कर रही है.

भीम सिंह ने बताया कि महेश जाटव के खिलाफ झूठा मुक़दमा दर्ज कराने का मामला चलाया जाएगा.

वहीं वकील रवि सिसोदिया का कहना है कि छह साल के बच्चे पर मुक़दमा नहीं लिखा जाना चाहिए क्योंकि आईपीसी की धारा 82 कहती है कि सात साल से कम उम्र के बच्चे का कोई भी कृत्य अपराध की श्रेणी में नहीं आएगा.

भीम सिंह भी मानते हैं कि छह साल के बच्चे पर मुकदमा नहीं लिखा जा सकता है.

मुक़दमा क्यों लिखा, इस सवाल पर वो कहते हैं, "ये लोग बच्चे के शव नहीं हटा रहे थे. उन्होंने अपनी शिकायत में स्कूल के प्रिंसिपल का नाम भी दिया था. आजकल पंचायत चुनाव चल रहे हैं. माहौल बिगड़ने से मुश्किल हो सकती थी. इसलिए मुकदमा लिख लिया गया. लेकिन हमें पोस्टमोर्टम रिपोर्ट का इंतज़ार था, जो अब आ गई है. इसके आधार पर जाटव के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी."

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