साहित्य अकादमी अवॉर्ड वापस लेने की अपील

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लेखकों के साहित्य अकादमी पुरस्कार लौटाने के सिलसिले के बाद साहित्य अकादमी ने एक विशेष बैठक बुलाकर डॉ एमएम कलबुर्गी की हत्या पर अफ़सोस ज़ाहिर किया है.

अकादमी ने डॉ कलबुर्गी और अन्य बुद्धिजीवियों की हत्याओं की कड़ी निंदा की है.

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भारत में बढ़ती कथित असहिष्णुता के ख़िलाफ़ साहित्य अकादमी पुरस्कार लौटाने वाले लेखकों से साहित्य अकादमी ने अवॉर्ड वापस लेने की अपील की है.

दिल्ली में अकादमी के कार्यकारी बोर्ड की बैठक में एक प्रस्ताव पारित किया गया जिसमें कहा गया है कि भारतीय साहित्य की एकमात्र स्वायत्त संस्था होने के नाते साहित्य अकादमी लेखकों की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का समर्थन करती है.

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अकादमी ने केन्द्र और राज्य सरकारों से कहा है कि लेखकों की हत्याओं के ज़िम्मेदार लोगों पर तुरंत कार्रवाई की जाए और देशभर में लेखकों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए.

अकादमी ने इस मौके पर साफ कर दिया कि साहित्य अकादमी के फैसले लेखक ही लेते हैं.

अकादमी ने इस्तीफ़ा देने वाले साहित्यकारों से भी अपने इस्तीफ़े वापस लेने की अपील की है.

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अकादमी ने सफाई दी है कि डॉ कलबुर्गी की हत्या के बाद अकादमी के अध्यक्ष ने उपाध्यक्ष से फोन पर बात कर डॉ कलबुर्गी के परिवार से संपर्क करने को कहा था.

वहीं कन्नड़ सलाहकार समिति के संयोजक ने एक बैठक में दूसरे लेखकों के साथ हत्या का विरोध जताया था.

इसके अलावा एक अन्य कार्यक्रम में भी डॉ कलबुर्गी की हत्या पर विरोध जताया गया.

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पिछले कुछ दिनों में डॉ कलबुर्गी की हत्या के मामले में अकादमी की चुप्पी से नाराज़ कई लेखकों ने अपने पुरस्कार लौटा दिए थे और साहित्य अकादमी में कुछ लेखकों ने अपने पदों से इस्तीफा भी दिया था.

वहीं दिल्ली में मंडी हाउस पर करीब सौ लेखकों ने मौन मार्च निकाला.

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