चलिए देश के पहले वाई-फ़ाई क़स्बे में

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दिल्ली से 275 किलोमीटर दूर बसा राजस्थान का भादरा भारत का पहला वाई-फ़ाई क़स्बा बन गया है.

चालीस हज़ार की आबादी वाले भादरा के लगभग वीरान स्टेशन पर प्रतिदिन सिर्फ़ दो ट्रेनें रुकती हैं. लेकिन क़स्बे के बस अड्डे से लेकर रेलवे स्टेशन और गलियों से लेकर मुख्य बाज़ार तक सभी अब इंटरनेट से जुड़ चुके हैं.

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मैंने पूरे क़स्बे में घूम कर जांचा और बिना किसी रुकावट के पूरे क़स्बा में इंटरनेट कनेक्शन पाया.

स्थानीय व्यापारी दलित कुमार जैन कहते हैं, "मैं बहुत खुश हूं, अब मैं अपने फोन पर कम समय में पूरी फ़िल्म डाउनलोड कर सकता हूं और ऑनलाइन पैसे भेज सकता हूं."

क़स्बे के छात्रों के लिए यह एक बड़ी सफलता है. अब उन्हें ऑनलाइन फॉर्म भरने, इंटरनेट से पढ़ने की सामग्री निकालना और दूसरी सूचनाओं के लिए भाग कर 160 किलोमीटर दूर हनुमानगढ़ नहीं जाना पड़ता.

जुलाई में वाई-फ़ाई पहुंचने के बाद से यहां नौकरियों के प्रशिक्षण देने वाले केंद्रों की संख्या में इज़ाफा हुआ है.

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यहां के हाईस्कूल में पढ़ने वाले छात्रों का कहना है कि वे अब इंटरनेट से परीक्षा के प्रश्न पत्र डाउनलोड करते हैं और ऑनलाइन गेम और सोशल मीडिया पर घंटों बिताते हैं.

कुछ महीने पहले तक भादरा में थोड़े ही इंटरनेट कनेक्शन थे. लेकिन अब भादरा सस्ते और तेज वाई-फ़ाई वाली जगह का बेहतरीन उदाहरण बन गया है.

वाई-फ़ाई ने यहां के लोगों की ज़िंदगी बदल दी है. यहां प्रति महीना एक जीबी डेटा की क़ीमत सिर्फ 64 रुपये है.

एमटीएस इंडिया ने राजस्थान के इस छोटे से कस्बे में यह सुविधा प्रदान की है. कंपनी के संदीप यादव, भादरा जैसे विकासशील क़स्बे को "बढ़ते भारत की ताकत" बताते हैं.

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वह कहते हैं, "जहां छोटे क़स्बों में लोग अभी स्मार्टफोन पर इंटरनेट इस्तेमाल करना सीख रहे हैं वहीं भादरा में हर रोज़ 160 जीबी की ख़पत है. इसलिए हम सोचते हैं कि सस्ती इंटरनेट सेवा यहां के लोगों के लिए लाभदायक होगी."

कंपनी राज्य के 11 और क़स्बों में वाई-फ़ाई सेवा देने की योजना बना रही है.

बस अड्डे के पास शौकत खान की दुकान में हमेशा भीड़ रहती है क्योंकि वे इंटरनेट इस्तेमाल करने वाले कूपन बेचते हैं.

उनका कहना है, "तो क्या हो गया कि भादरा एक छोटा क़स्बा है? यहां के 8,500 लोग खाड़ी देशों में काम करते हैं. इस वजह से वीडियो कॉलिंग और रीचार्जिंग की भारी मांग रहती है. लोग बाहर रहने वाले अपने लोगों के संपर्क में रहना चाहते हैं."

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स्थानीय निवासी रवीन्द्र यादव का कहना है कि तीन साल पहले तक यहां के लोगों को बढ़िया मोबाइल कनेक्शन नहीं मिल पाता था और मस्कट जैसे खाड़ी देश में बात करने की क़ीमत करीब 20 रुपये प्रति मिनट थी.

क़स्बे के नौजवान कहते हैं कि इस वाई-फ़ाई क्रांति से बुजुर्ग अभी अछूते हैं.

16 साल की लक्ष्मी कहती हैं, "हमें इस बारे में कुछ करने की ज़रूरत है. इसलिए मैं अपने मां के लिए इस दीवाली पर स्मार्टफोन खरीदना चाहती हूं. इसके लिए मैं पैसे बचा रही रही हूं."

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