सियासत मेें अंतिम पड़ाव की ओर हूं: मांझी

बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और हिन्दुस्तानी आवाम मोर्चा के प्रमुख जीतनराम मांझी ने कहा है कि वो मुख्यमंत्री पद के दावेदार नहीं हैं लेकिन एनडीए ने मुख्यमंत्री बनने को कहा तो इनकार नहीं करेंगे.

बीबीसी के साथ ख़ास बातचीत में जीतनराम मांझी ने दावा किया कि एनडीए को बिहार में दो-तिहाई बहुमत मिलेगा.

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उन्होंने पहले दो चरण के 81 में से 60 सीटों पर एनडीए की जीत का दावा किया है. मांझी ने दावा किया कि बिहार के चुनाव परिणाम चौंकाने वाले होंगे और इसमें एनडीए को उम्मीद से बहुत ज़्यादा सीटें मिलने वाली हैं.

एनडीए के अंदर चुनावी डर को लेकर जीतनराम मांझी ने कहा कि दुश्मन को कभी कमज़ोर नहीं समझना चाहिए.

मांझी ने कहा, "हम बिहार में विकास की बात करते हैं लेकिन महागठबंधन गोमांस, शैतान, डीएनए, आरक्षण और दलित जैसे मुद्दों को बार-बार उठाता है."

भाजपा नेताओं के विवादास्पद बयानों पर जीतनराम मांझी ने कहा कि सबको बयान देते हुए संयम बरतना चाहिए.

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उन्होंने कहा कि केंद्रीय मंत्री वीके सिंह ने अपने बयान पर माफ़ी मांग ली है. लेकिन किसी को भी इस तरह की भाषा का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए.

बिहार विधानसभा चुनाव परिणामों के बाद जीतनराम मांझी की भूमिका काफ़ी अहम हो सकती है.

माना जा रहा है कि कई दलों की नज़र उन पर है और चुनाव परिणामों के बाद मांझी को रिझाने की कोशिश की जा सकती है.

इस संभावना पर मांझी ने कहा कि "मैं वचन पर काम करता हूं- आई एम ए मैन ऑफ़ वर्ड्स. अगर बाद में मुझे कोई मुख्यमंत्री का पद भी देगा तो एनडीए को छोड़कर नहीं जाउंगा".

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जीतनराम मांझी ने कहा कि वो शुरू में ज़्यादा सीट इसलिए मांग रहे थे क्योंकि जितनी सीटों पर उनकी पार्टी लड़ती एनडीए की जीत उतनी ही बड़ी होती. हालांकि गठबंधन में 21 सीटें मिलने पर भी वो संतुष्ट हैं.

परिवारवाद पर बात करते हुए मांझी ने कहा कि हर कोई एक जैसा नहीं होता है और उनके बेटे संतोष कुमार बिहार के सभी राजनेताओं के बेटों में सबसे ज़्यादा योग्य है और वो 1998 से राजनीति में है.

मांझी ने दावा किया कि उन्होंने अपने बेटे को योग्यता के आधार पर टिकट दिया है.

राजनीति से संन्यास लेने के बारे में मांझी ने बताया कि वो 70 साल के हो चुके हैं और राजनीति में वो अंतिम पड़ाव की ओर हैं. मांझी ने कहा कि हर किसी को 75 साल के बाद राजनीति से संन्यास ले लेना चाहिए.

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