आरबीआई गवर्नर ने कहा असहनशीलता में हो कटौती

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भारतीय रिज़र्व बैंक के गवर्नर रघुराम राजन ने कहा है कि मुल्क में सहनशीलता और आपसी सम्मान का बेहतर माहौल होना चाहिए, और साथ ही बोले हैं कि लोगों को सवाल उठाने और चुनौती देने का अधिकार हासिल होना चाहिए क्योंकि वो विकास के लिए ज़रूरी है.

इसी तरह की एक और आवाज़ उठी, और ठीक उसी दिन, इंफ़ोसिस के संस्थापक एनआर नारायाणमूर्ति की तरफ़ से जिन्होंने कहा है कि अल्पसंख्यकों में डर का माहौल है.

एनडीटीवी को दिए एक इंटरव्यू में नारायणमूर्ति ने कहा कि इस भावना को ख़त्म करना आर्थिक प्रगति के लिए ज़रूरी है.

भारतीय मूल के मशहूर संगीतकार ज़ुबीन मेहता ने भी बयान दिया है कि भारत के पंद्रह करोड़ मुसलमानों को अकेला नहीं छोड़ा जा सकता.

ये सभी बयान ठीक एक ही दिन आए हैं और ऐसे वक़्त में जब नरेंद्र मोदी सरकार और बीजेपी पुरस्कार लौटाने और पद त्याग करने वाले साहित्यकारों, वैज्ञानिकों, फ़िल्म जगत के लोगों और इतिहासकारों को कुंठित मानसिकता से ग्रसित बताने की कोशिश कर रही है.

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दिल्ली आईआईटी के एक कार्यक्रम में बोलते हुए रिज़र्व बैंक गवर्नर ने कहा कि 'राजनीतिक रूप से सही होने की अत्याधिक कोशिशें तरक्की में रुकावट पैदा कर रही हैं.'

उन्होंने कहा कि ऐसे किसी काम को किसी भी सूरत में नहीं होने देना चाहिए जो किसी को शारिरिक रूप से चोट पहुँचाए या किसी एक ख़ास समूह के ख़िलाफ़ बयानबाज़ी की जाए.

उन्होंने कहा कि प्रतिबंध लगाने से बेहतर सहनशीलता और आपसी सम्मान के ज़रिए सभी विचारों के लिए माहौल सुधारना है.

नारायाणमूर्ति ने एनडीटीवी को दिए गए एक इंटरव्यू में कहा है कि भारतीय अल्पसंख्यकों में भय का माहौल है जो आर्थिक प्रगति के लिए बेहतर नहीं.

एनडीटीवी को ही दिए गए एक साक्षात्कार में भारतीय मूल के मशहूर संगीतकार ज़ुबीन मेहता ने कहा, "भारत में पंद्रह करोड़ से अधिक मुसलमान हैं, उन्हें अकेला नहीं छोड़ा जा सकता."

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उन्होंने कहा कि मैं समझ नहीं पाता हूँ कि पाकिस्तानी क्रिकेटरों को भारतीय लीग में क्यों खेलने नहीं दिया जाता है.

ज़ुबीन मेहता ने पुरस्कार लौटा रहे लेखकों, साहित्यकारों और कलाकारों का समर्थन करते हुए कहा कि उनके मुद्दों को समझने की ज़रूरत है.

वहीं दिल्ली हाई कोर्ट की स्वर्ण जयंती पर अपने भाषण में राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने कहा, "बहुलता हमारी सामूहिक शक्ति है जिसकी हर क़ीमत पर रक्षा की जानी चाहिए."

उन्होंने कहा कि ये बात संविधान में भी कई बार कही गई है.

भारतीय राष्ट्रपति हाल में ही कई बार विविधता और सहिष्णुता की बात कर चुके हैं.

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Image caption राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी कई बार सहिष्णुता का उल्लेख कर चुके हैं.

इन बयानों पर टिप्पणी करते हुए कांग्रेस के प्रवक्ता आनंद शर्मा ने कहा कि भारत में पिछले कुछ महीनों संवैधानिक आज़ादी पर चोट पहुँचाने वाले हमले बढ़े हैं. उन्होंने कहा कि इस दौरान प्रधानमंत्री मौनव्रत पर हैं.

केंद्रीय राज्य मंत्री जयंत सिन्हा ने कहा कि प्रधानमंत्री इन बातों पर बयान दे चुके हैं और संवैधानिक अधिकारों की पूरी ताक़त से हिफ़ाज़त की जाएगी.

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